खालिस्तानियों के दंगे की समर्थक मीना हैरिस इस बात से नाराज हैं कि भारत में उनके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन क्यों हो रहा है। उनके पोस्टर्स क्यों जलाए जा रहे हैं?
हाथरस में आरोपित की जाति पर जोर देने वाली रोहिणी सिंह जैसी लिबरल, बलरामपुर में दलित से रेप पर चुप हो जाती हैं? क्या जाति की तरह मजहब अहम पहलू नहीं होता?