26/11 हमलों की बरसी के मौके पर मेंगलुरु की दीवारों पर भयावह बातें लिखी (ग्राफिटी) हुई थीं। जिसमें चेतावनी दी गई थी कि ‘संघी और मनुवादियों’ को ख़त्म करने के लिए लश्कर-ए-तैय्यबा और तालिबान की मदद ली जा सकती है।
द वायर सरीखे एजेंडापरस्त मीडिया समूहों के लिए इस श्रेणी का गिरगिटनुमा विश्लेषण या दावा कोई नई बात नहीं है। प्रोपेगेंडा ही इनका एकमात्र उद्देश्य है भले उसके लिए स्क्रीन पर कुछ अनर्गल ही क्यों न परोसना पड़े।
सोनू निगम ने वीडियो में लेख प्रकाशित करने वाले मीडिया समूह के संबंध में कहा, “यह वीडियो उन दल्लों के लिए है।” फिर उन्होंने ट्रिब्यून के संपादक को संबोधित करते हुए कहा, “तू सोता कैसे है दल्ले?”
PM मोदी ने कहा कि किसी एक बात जिसने हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुँचाया है- वो राष्ट्रहित से ज्यादा प्राथमिकता अपनी विचारधारा को देना है
भाकपा (माले) नेता ने कहा कि भाजपा देश में लोकतंत्र ख़त्म कर रही है और वो नहीं जीते तो बिहार में भी यही होगा। उन्होंने कहा कि बिहार में उनकी सरकार नहीं बनी तो वहाँ लोकतंत्र की हत्या हो जाएगी।
वामपंथीऔर उदारवादियों को यदि किसी मजहब में ज्ञान देना ही है तो उन्हें उन मजहब से शुरुआत करनी चाहिए, जहाँ समाज को शिक्षित करने की सजा गला रेतने के रूप में मिलती है।
हिन्दुओ! अपनी सहिष्णुता को अपनी कमजोरी मत बनाओ। सहिष्णुता की सीमा होती है, पागल कुत्ते के साथ शयन नहीं किया जा सकता, भले ही तुम कितने ही बड़े पशुप्रेमी क्यों न हो।