Sunday, November 29, 2020
Home विचार राजनैतिक मुद्दे बिहार को बढ़ना है तो धर्मांतरण, कट्टरपंथ और वामपंथ के कैंसर को हराना ही...

बिहार को बढ़ना है तो धर्मांतरण, कट्टरपंथ और वामपंथ के कैंसर को हराना ही होगा…

बिहार का जनादेश स्पष्ट है। नीतीश की सदारत में ही बीजेपी को कट्टरपंथ, वामपंथ और धर्मांतरण से लड़ने का रास्ता तलाशना होगा। सरकार के तौर पर भी, संगठन के तौर पर भी।

बिहार में आज (16 नवंबर 2020) नई सरकार का गठन हो गया। नीतीश कुमार ने सातवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ 14 मंत्रियों ने भी शपथ ली।

इस कैबिनेट की उसी तरह अलग-अलग व्याख्या होगी, जैसे बिहार के जनादेश की हो रही है। जब तक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं होता, आकलन का दौर भी उसी तरह चलेगा जैसा नतीजों और फिर डिप्टी सीएम को लेकर मीडिया में चल रहा था।

जैसा कि नतीजों के आने से पहले भी ऑपइंडिया ने कहा था कि बिहार में कोई भी सरकार नीतीश कुमार के जदयू के बिना नहीं बन सकती और मुख्यमंत्री बनना या नहीं बनना नीतीश कुमार के विवेक पर ही निर्भर करेगा। हालाँकि नीतीश कुमार का दावा है कि उन्होंने बीजेपी से अपना मुख्यमंत्री बनाने को कहा था, लेकिन उनका यह आग्रह नहीं माना गया। पर एक सच यह भी है कि राजनीति उतनी भी सीधी रेखा में नहीं चलती, जितनी वह ​नीतीश कुमार के इस ‘निर्दोष बयान’ में दिखती है। लिहाजा, यह सरकार कब तक चलेगी, बीजेपी ने ज्यादा सीटें होते हुए भी अपना मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया या धनबल और बाहुबल के बल पर राजद इस सरकार को गिरा देगी, इन सारे सवालों के जवाब भविष्य में छिपे हैं।

पर क्या बाढ़, बदहाली और बेरोजगारी की पहचान के साथ घिसट रहे बिहार के सामने असल चुनौतियॉं इन्हीं सवालों का जवाब तलाशना है? नहीं, बिलकुल नहीं। उसके सामने तीन बड़ी चुनौतियाँ हैं। इनसे निपटे बिना बिहार आगे नहीं बढ़ सकता है। ये हैं,

  1. वामपंथ
  2. कट्टरपंथ
  3. धर्मांतरण

बिहार में बीजेपी की चुनावी सफलता और एनडीए के सरकार बचा ले जाने के पीछे भी इन खतरों का बढ़ता प्रभाव ही है। भले वामपंथी दलों को 16 सीटें मिल जाना उनका पुनर्भव नहीं हो, लेकिन इसने उन्हें राज्य की मुख्यधारा की राजनीति में लौटने का अवसर जरूर उपलब्ध करा दिया है। राजद के कोर वोटर की बदौलत उन्होंने यह सफलता तब हासिल की है, जब गिनती के जिलों में माले के प्रभाव को छोड़ दें तो राज्य में वामपंथ का नामलेवा नहीं बचा था। तमाम प्रोपेगेंडा के बावजूद 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार की जनता ने वामपंथ के पोस्टर बॉय कन्हैया कुमार को नकार दिया था। बाद में यात्रा के जरिए सियासी जमीन तलाशने की उसकी कोशिश का भी जगह-जगह विरोध हुआ था।

वामपंथी राजनीति पर अंकुश इसलिए भी जरूरी है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो बिहार एक बार फिर से जातीय हिंसा के उस दौर में पहुँचा सकता है, जिसके जख्म अब भी गहरे हैं। खतरा यह भी है कि एक बार फिर उनके साथ बिहार को ‘जंगलराज’ देने वाले भी हैं।

इसी तरह चुनाव के आखिरी चरण में जिस तरह सीमांचल, तिरहुत और मिथिलांचल के लोगों ने एनडीए को समर्थन दिया वह कहीं न कहीं इन इलाकों में कट्टरपंथ के बढ़ते प्रभाव से लोगों की चिंता को दिखाता है। ऑपइंडिया की चुनावी कवरेज के दौरान उम्मीदवार भले आचार संहिता का हवाला देकर इसका जवाब देने से कन्नी काट रहे थे, लेकिन लोग खुलकर इस मुद्दे को उठा रहे थे। यही कारण है कि उन सीटों पर भी बीजेपी जीती है जो उसके लिए कभी आसान नहीं रही। राज्य में असदुद्दीन ओवैसी की ‘जहरीली राजनीति’ को लेकर भी लोग मुखर थे। सीमांचल में उनके पाँच उम्मीदवारों का जीतना चिंताजनक है। वैसे भी किशनगंज और नेपाल की सीमा से सटे बिहार के इलाकों में तेजी से बदलती जनसांख्किीय और घुसपैठ अरसे से बड़ी समस्या बनी हुई है।

इनके साथ बिहार के सुदूर इलाकों में ईसाई मिशनरियों को बढ़ता प्रभाव भी चिंताजनक है। मधुबनी के देहात में लोगों को बहला-फुसलाकर जब हमने धर्मांतरण किए जाने की रिपोर्ट की थी, उसके बाद से बिहार का कोई जिला नहीं बचा है, जहाँ के लोगों ने हमें संदेश भेजकर यह नहीं बताया हो कि उनके यहाँ भी यह खेल चल रहा है। जबकि अब तक माना जाता था कि यह झारखंड से सटे इलाकों की ही समस्या है।

बिहार के लिए अच्छी बात यह है कि इन मुद्दों पर बीजेपी गंभीर दिखती है। उसने नीतीश की नई कैबिनेट में जीवेश मिश्र जैसे लोगों को जगह भी दी है जो इन मुद्दों को लेकर मुखर है। लेकिन, ज्यादा चिंता की बात नेतृत्व की भूमिका में उस नीतीश कुमार का होना है, जिनकी जमीन पर छवि एक खास मजहब के प्रति झुकाव रखने वाली की है। इस बार भी कई जगहों पर प्रशासन ने दुर्गा मूर्ति तोड़ दी थी, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। चुनाव के दौरान मुंगेर की घटना हुई और उस पर भी सख्त प्रतिक्रिया देने से सरकार में शामिल लोग बचते रहे।

इस बार जैसे-तैसे सरकार बचाने में सफल रही एनडीए के लिए जनादेश स्पष्ट है। जनता यह स्वीकार कर सकती है कि राजनैतिक मजबूरियों की वजह से बीजेपी नीतीश कुमार की सदारत स्वीकार कर ले। लेकिन, उसे इन मुद्दों की अनदेखी कबूल नहीं होगी। बीजेपी को वह रास्ता तलाशना ही होगा जिससे वह इन तीन मोर्चों पर बिहार में लड़ती नजर आए। सरकार के तौर पर भी और संगठन के तौर पर भी।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत झा
देसिल बयना सब जन मिट्ठा

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत के लिए गृहमंत्री अमित शाह ने संभाला मोर्चा, कहा- पहले हाईवे खाली कर तय मैदान में जाएँ

“मैं प्रदर्शनकारी किसानों से अपील करता हूँ कि भारत सरकार बातचीत करने के लिए तैयार है। कृषि मंत्री ने उन्हें 3 दिसंबर को चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। सरकार किसानों की हर समस्या और माँग पर विचार करने के लिए तैयार है।”

ओवैसी के गढ़ में रोड शो कर CM योगी आदित्‍यनाथ ने दी चुनौती, गूँजा- आया आया शेर आया… देखें वीडियो

सीएम योगी के रोड शो के में- ‘आया आया शेर आया.... राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की’, योगी-योगी, जय श्री राम, भारत माता की जय और वंदे मातरम के भी गगनभेदी नारे लगाए गए।

प्रदर्शन करने वाले किसानों को $1 मिलियन का ऑफर, खालिस्तान के समर्थन में खुलेआम नारेबाजी: क्या है SFJ का मास्टरप्लान

किसान आंदोलन पर खालिस्तान समर्थक ताकतों ने कब्ज़ा कर लिया है। SFJ पहले ही इस बात का ऐलान कर चुका है कि वह खालिस्तान का समर्थन करने वाले पंजाब और हरियाणा के किसानों को 10 लाख रूपए की आर्थिक मदद करेगा।

शादी में पैसा, फ्री कार, मस्जिद-दरगाहों का विकास: तेलंगाना में ‘अल्पसंख्यकों’ पर 6 साल में ₹5600 करोड़ खर्च

तेलंगाना में अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के लिए सरकारी खजाने का नायाब उपयोग सामने आया है। तेलंगाना सरकार ने पिछले 6 वर्षों में राज्य में अल्पसंख्यक केंद्रित योजनाओं पर 5,639.44 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

ना MSP ख़त्म होगी, न APMC पर कोई फर्क पड़ेगा: जानिए मोदी सरकार के कृषि कानूनों को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों का सच

MSP हट जाएगा? APMC की शक्तियाँ ख़त्म हो जाएँगी? किसानों को फसल का नुकसान होगा? व्यापारियों की चाँदी होगी? कॉन्ट्रैक्ट कर के किसान फँस जाएँगे? जानिए सारी सच्चाई।

कैसे बन रही कोरोना वैक्सीन? अहमदाबाद और हैदराबाद में PM मोदी ने लिया जायजा, पुणे भी जाएँगे

कोरोना महामारी संकट के बीच शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में कोरोना वैक्सीन की तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। इसके तहत पीएम मोदी देश के तीन शहरों के दौरे पर हैं।

प्रचलित ख़बरें

‘कबीर असली अल्लाह, रामपाल अंतिम पैगंबर और मुस्लिम असल इस्लाम से अनजान’: फॉलोवरों के अजीब दावों से पटा सोशल मीडिया

साल 2006 में रामपाल के भक्तों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें 5 महिलाओं और 1 बच्चे की मृत्यु हुई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे। इसके बाद नवंबर 2014 में उसे गिरफ्तार किया गया था।

मैं नपुंसक नहीं.. हिंदुत्व का मतलब पूजा-पाठ या मंदिर का घंटा बजाना नहीं, फ़ोर्स किया तो हाथ धोकर पीछे पड़ जाऊँगा: उद्धव ठाकरे

साक्षत्कार में उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें विरोधियों के पीछे पड़ने को मजबूर ना किया जाए। इसके साथ ही ठाकरे ने कहा कि हिंदुत्व का मतलब मंदिर का घंटा बजाना नहीं है।

‘उसे मत मारो, वही तो सबूत है’: हिंदुओं संजय गोविलकर का एहसान मानो वरना 26/11 तुम्हारे सिर डाला जाता

जब कसाब ने तुकाराम को गोलियों से छलनी कर दिया तो साथी पुलिसकर्मी आवेश में आ गए। वे कसाब को मार गिराना चाहते थे। लेकिन, इंस्पेक्टर गोविलकर ने ऐसा नहीं करने की सलाह दी। यदि गोविलकर ने उस दिन ऐसा नहीं किया होता तो दुनिया कसाब को समीर चौधरी के नाम से जानती।

दिल्ली दंगों के दौरान मुस्लिमों को भड़काने वाला संगठन ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों को पहुँचा रहा भोजन: 25 मस्जिद काम में लगे

UAH के मुखिया नदीम खान ने कहा कि मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे लोगों को मदद पहुँचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।

ये कौन से किसान हैं जो कह रहे ‘इंदिरा को ठोका, मोदी को भी ठोक देंगे’, मिले खालिस्तानी समर्थन के प्रमाण

मीटिंग 3 दिसंबर को तय की गई है और हम तब तक यहीं पर रहने वाले हैं। अगर उस मीटिंग में कुछ हल नहीं निकला तो बैरिकेड तो क्या हम तो इनको (शासन प्रशासन) ऐसे ही मिटा देंगे।

31 का कामिर खान, 11 साल की बच्ची: 3 महीने में 4000 मैसेज भेजे, यौन शोषण किया; निकाह करना चाहता था

कामिर खान ने स्वीकार किया है कि उसने दो बार 11 वर्षीय बच्ची का यौन शोषण किया। उसे गलत तरीके से छुआ, यौन सम्बन्ध बनाने के लिए उकसाया और अश्लील मैसेज भेजे।

दिवंगत वाजिद खान की पत्नी ने अंतर-धार्मिक विवाह की अपनी पीड़ा पर लिखा पोस्ट, कहा- धर्मांतरण विरोधी कानून का राष्ट्रीयकरण होना चाहिए

कमलरुख ने खुलासा किया कि कैसे इस्लाम में परिवर्तित होने के उनके प्रतिरोध ने उनके और उनके दिवंगत पति के बीच की खाई को बढ़ा दिया।

प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत के लिए गृहमंत्री अमित शाह ने संभाला मोर्चा, कहा- पहले हाईवे खाली कर तय मैदान में जाएँ

“मैं प्रदर्शनकारी किसानों से अपील करता हूँ कि भारत सरकार बातचीत करने के लिए तैयार है। कृषि मंत्री ने उन्हें 3 दिसंबर को चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। सरकार किसानों की हर समस्या और माँग पर विचार करने के लिए तैयार है।”

खालिस्तानियों के बाद कट्टरपंथी PFI भी उतरा ‘किसान विरोध’ के समर्थन में, अलापा संविधान बचाने का पुराना राग

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ओएमए सलाम ने भी घोषणा किया कि उनका इस्लामी संगठन ‘दिल्ली चलो’ मार्च का समर्थन करेगा। वह किसानों की माँगों के साथ खड़े हैं।

ओवैसी के गढ़ में रोड शो कर CM योगी आदित्‍यनाथ ने दी चुनौती, गूँजा- आया आया शेर आया… देखें वीडियो

सीएम योगी के रोड शो के में- ‘आया आया शेर आया.... राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की’, योगी-योगी, जय श्री राम, भारत माता की जय और वंदे मातरम के भी गगनभेदी नारे लगाए गए।

भोपाल स्टेशन के सालों पुराने ‘ईरानी डेरे’ पर चला शिवराज सरकार का बुलडोजर, हाल ही में हुआ था पुलिस पर पथराव

साल 2017 के एक आदेश में अदालत ने इस ज़मीन को सरकारी बताया था लेकिन अदालत के आदेश के बावजूद ईरानी यहाँ से कब्ज़ा नहीं हटा रहे थे।

मुंबई मेयर के ‘दो टके के लोग’ वाले बयान पर कंगना रनौत ने किया पलटवार, महाराष्ट्र सरकार पर कसा तंज

“जितने लीगल केस, गालियाँ और बेइज्जती मुझे महाराष्ट्र सरकार से मिली है, उसे देखते हुए तो अब मुझे ये बॉलीवुड माफिया और ऋतिक-आदित्य जैसे एक्टर भी भले लोग लगने लगे हैं।”

प्रदर्शन करने वाले किसानों को $1 मिलियन का ऑफर, खालिस्तान के समर्थन में खुलेआम नारेबाजी: क्या है SFJ का मास्टरप्लान

किसान आंदोलन पर खालिस्तान समर्थक ताकतों ने कब्ज़ा कर लिया है। SFJ पहले ही इस बात का ऐलान कर चुका है कि वह खालिस्तान का समर्थन करने वाले पंजाब और हरियाणा के किसानों को 10 लाख रूपए की आर्थिक मदद करेगा।

SEBI ने NDTV के प्रमोटरों प्रणय रॉय, राधिका रॉय और विक्रम चंद्रा समेत 2 अन्य को किया ट्रेडिंग से प्रतिबंधित, जानिए क्या है मामला

भारत के पूँजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने विवादास्पद मीडिया नेटवर्क NDTV के प्रवर्तकों प्रणय रॉय और राधिका रॉय को इनसाइडर ट्रेडिंग से अनुचित लाभ उठाने का दोषी पाया है।

शादी में पैसा, फ्री कार, मस्जिद-दरगाहों का विकास: तेलंगाना में ‘अल्पसंख्यकों’ पर 6 साल में ₹5600 करोड़ खर्च

तेलंगाना में अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के लिए सरकारी खजाने का नायाब उपयोग सामने आया है। तेलंगाना सरकार ने पिछले 6 वर्षों में राज्य में अल्पसंख्यक केंद्रित योजनाओं पर 5,639.44 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

ना MSP ख़त्म होगी, न APMC पर कोई फर्क पड़ेगा: जानिए मोदी सरकार के कृषि कानूनों को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों का सच

MSP हट जाएगा? APMC की शक्तियाँ ख़त्म हो जाएँगी? किसानों को फसल का नुकसान होगा? व्यापारियों की चाँदी होगी? कॉन्ट्रैक्ट कर के किसान फँस जाएँगे? जानिए सारी सच्चाई।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,444FollowersFollow
358,000SubscribersSubscribe