सामना के संपादक और शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि हम चाहते हैं कि
अयोध्या दौरे के लिए हमारे गठबंधन के नेताओं को भी साथ आना चाहिए। इतना ही नहीं राउत ने आगे ये भी कहा कि राहुल गाँधी पहले से ही मंदिरों में जाते भी हैं।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से पहले विहिप का बड़े कार्यक्रम का ऐलान। ‘रामोत्सव’ नाम से चलने वाला यह कार्यक्रम 25 मार्च को शुरू होगा और 8 अप्रैल को इसका समापन होगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय में तीन अधिकारियों का डेस्क बनाया गया है जो अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से संबंधित सभी मामलों को देखेगी। पिछले महीने ही अमित शाह ने कहा था कि अयोध्या में चार महीने के भीतर भव्य राम मंदिर का निर्माण पूरा होगा।
"बाबरी मस्जिद के मलबे के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में कोई स्पष्ट आदेश नहीं है। ऐसे में मलबे के हटाने के समय उसका अनादर किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि हम तीन शताब्दी से इस मस्जिद में नमाज पढ़ते आ रहे थे, इसलिए इसके मलबे पर हम अपने हक के लिए याचिका दायर करेंगे।"
ये सन्देश जैश के सबसे बड़े सरगना मसूद अजहर का था। इस सन्देश से पता चला है कि कुछ बड़े आतंकी अयोध्या को दहलाने की साज़िश रच रहे हैं। एक टेलीग्राम चैनल में आए सन्देश को इंटरसेप्ट कर भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों ने इस बड़ी साज़िश की पोल खोली है।
कॉन्ग्रेस, RJD, झामुमो और CPI-ML के गठबंधन पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और माओवादियों का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए, योगी ने कहा, "कॉन्ग्रेस, RJD, झामुमो और CPI-ML की नीतियों ने चरमपंथ को बढ़ावा दिया है और उन्हें व्यापक नुकसान पहुँचाने में सक्षम बनाया है।"
भारतीयों ने जिन सवालों के जवाब सबसे ज्यादा तलाशे वे राजनैतिक और सामाजिक क्षेत्र के अलावा खेल और मनोरंजन से भी जुड़े हैं। यहॉं तक कि होली के रंग कैसे छुड़ाए, यह सवाल भी गूगल से पूछा गया। जाने कौन से थे टॉप 20 सवाल।
राम जन्मभूमि मंदिर में विघ्न डालने के आज आखिरी दरवाजे भी सुप्रीम कोर्ट ने बंद कर दिए हैं। जमीयत उलेमा ए हिन्द, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के इशारे पर याचिका डालने वालों, इरफ़ान हबीब-प्रशांत भूषण के लिबरल गिरोह समेत 18 याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट की नई संविधान पीठ ने ख़ारिज कर दी हैं।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एक आस्था को तरजीह देना वाला बताया गया है। कहा गया है कि हिन्दू पक्ष को जन्मभूमि की ज़मीन देने का आधार केवल आस्था को माना गया है। मस्जिद के पक्ष में पुरातात्विक साक्ष्यों को नज़रंदाज़ कर दिया गया।