सैम पित्रोदा के दिए बयान पर आज बवाल हो रहा है लेकिन सच ये है कि भारत की जनता की संपत्ति के पीछे कॉन्ग्रेस 2011 से पड़ी थी। तब, पी चिदंबरम ने इस मुद्दे को उठाया था।
कॉन्ग्रेस पार्टी को हर सीट पर दमदार कैंडिडेट नहीं मिल रहे और कहीं कैंडिडेट आखिरी समय में मिल गए, और उन्होंने नामांकन दाखिल कर भी दिया, तो अब कॉन्ग्रेस की कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगानी पड़ रही है अपने ही कैंडिडेट को हराने के लिए।
कॉन्ग्रेस हिंदुओं से जीते-जी उनकी दौलत छीन कर बाँट देगी, तो मरने के बाद उनकी संपत्ति का 55 प्रतिशत हिस्सा भी ले लेगी। वारिसों को सिर्फ 45% हिस्सा ही मिलेगा।