कमलनाथ ने भी राज्यपाल टंडन को पत्र लिखा था, जिस पर राज्यपाल ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें लिखे गए पत्र की भाषा अशोभनीय है और संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
NSUI नेता अहर्निश मिश्रा बार-बार प्रोफ़ेसर पर यह बोलने का भी दबाव बना रहा था कि “बोल, मैं अतुल, मेरी माँ का भो#$@।” NSUI नेताओं ने माँ सरस्वती के लिए भी अपशब्दों का प्रयोग किया और संस्कृत भाषा का मजाक बनाया। जान से मार डालने की धमकी दी।
MP में कुल विधानसभा सदस्यों की संख्या 230 है। इनमें से 2 विधायकों की मृत्यु हो चुकी है। यानी वर्तमान संख्या 228 है। कॉन्ग्रेस में हुई बगावत के पहले पार्टी के पास थे 114 विधायक, भाजपा के पास थे 107, सपा के एक , बसपा के दो और निर्दलीय विधायक थे कुल चार। अब इसमें से अगर उन 22 कॉन्ग्रेसी विधायकों को निकाल दिया जाए, जिन्होंने अपने इस्तीफे...
मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार के कैबिनेट मंत्री पीसी शर्मा ने देवी की शरण में जाकर उन्हें अनुष्ठान करके मनाने की कोशिश की। उन्होंने आगर मालवा जिले के नलखेड़ा में विशेष किस्म का 'शत्रु विनाशक हवन' किया।
कोरोना से निपटने पर हाई लेवल मीटिंग हो और उसमें स्वास्थ्य मंत्री को ही नहीं बुलाया जाए, तो इसके क्या मायने हो सकते हैं। कुछ ऐसा ही छत्तीसगढ़ में हुआ है। सीएम ने स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव के बिना ही कोरोना से निपटने पर चर्चा कर ली।
"ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं, भारत हर मामले में पीछे है।" - राजस्थान महिला कॉन्ग्रेस की महासचिव रीना मिमरोत ने ट्विटर पर यह लिखा, क्यों लिखा इसका जवाब सिर्फ वो या कॉन्ग्रेस दे सकती है।
कॉन्ग्रेस ख़ुद अपनी सरकार बचाने को लेकर आश्वस्त नहीं, उसे पता है कि सदन में वो अल्पमत में है। तभी विधायकों को अपनी पार्टी के साथ बाँध रखने में अक्षम CM कमलनाथ को गृहमंत्री अमित शाह को लंबा-चौड़ा 4 पेज का लेटर लिखना पड़ गया।
सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद ईओडब्ल्यू ने जमीन घोटाले की फिर से जाँच शुरू की है। 10 हजार करोड़ रुपए के इस मामले की पहली बार जॉंच शिवराज सरकार के जमाने में हुई थी। सबूत न मिलने पर फाइल बंद कर दी गई थी।
जयपुर के दो रिसॉर्ट में कॉन्ग्रेस ने मध्य प्रदेश के अपने विधायकों को रखा है। रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का यह 14वॉं मौका है। अब तक नौ राज्यों की सियासी उठापठक की वजह से यह देखने को मिला है। इस सिलसिले की शुरुआत 1982 में कॉन्ग्रेस के ही भय से हुई थी।
लोकसभा चुनाव के वक्त सार्वजनिक तौर पर कहा गया था कि राज्यसभा चुनाव के वक्त राजद अपने कोटे की एक सीट कॉन्ग्रेस को देगी। लेकिन, अब उसने दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। ऐसा कॉन्ग्रेस के वादा याद दिलाने के बावजूद किया गया है।