Sunday, August 1, 2021
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मैं तुम्हें ऑटो-रिक्शा और स्कूटर भेजूँगी, तुम उन्हें बस समझना: गाँधी (प्रियंका) 2.0

कुछ लोग इसे चारा घोटाले की ही तर्ज पर किया जा रहा बस-घोटाला साबित करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में यह घोटाला नहीं बल्कि एक चमत्कार है। बसों की जगह ऑटो-रिक्शा बरामद होने से मीडिया, श्रमिक, सोशल मीडिया सभी लोगों में दहशत का माहौल है जबकि गाँधी परिवार ऐसे चमत्कारों का अभ्यस्त है।

नेहरू जी ने इस देश को बसें दीं, लेकिन आजादी के इतने वर्ष बाद केंद्र की फासिस्ट सरकार ने उन बसों के साथ क्या किया? बसें ऑटो-रिक्शा में तब्दील कर दी गईं। जो नहीं बनीं, उन्हें बलपूर्वक कार और दुपहिया वाहन बना दिया गया।

यह सब इसी देश में हुआ है, ये बात और है कि यह कारनामा प्रियंका गाँधी वाड्रा ने किया है। लेकिन ध्यान देने की बात ये है कि ये सब तब हुआ जब केंद्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार है और उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार।

इंदिरा 2.0

हुआ ये है कि कोरोना महामारी के दौरान किसी भी तरह मीडिया में बने रहने की कोशिश में लॉकडाउन की वजह से कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने श्रमिकों के लिए 1000 बसों के संचालन के लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से अनुमति माँगी थी। सीएम योगी ने इसकी ‘परमिशन’ भी दे दी।

लेकिन कॉन्ग्रेस द्वारा भेजी गईं इन बसों की सूची में कई बाइक, स्कूटर, ऑटो-रिक्शा और एम्बुलेंस के नंबर निकल आए हैं। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी की बेटी, जिन्हें इंदिरा-2.0 भी कहा जाता है, यानी प्रियंका गाँधी द्वारा जारी सूची में ऑटो-रिक्शा के साथ-साथ कई ऐसे वाहन भी हैं, जो ब्लैकलिस्टेड हैं।

जनता शॉक्स प्रियंका रॉक्स

कुछ लोग इसे चारा घोटाले की ही तर्ज पर किया जा रहा बस-घोटाला साबित करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में यह घोटाला नहीं बल्कि एक चमत्कार है। बसों की जगह ऑटो-रिक्शा बरामद होने से मीडिया, श्रमिक, सोशल मीडिया सभी लोगों में दहशत का माहौल है जबकि गाँधी परिवार ऐसे चमत्कारों का अभ्यस्त है।

आखिरी बार जब गाँधी परिवार ने कोई चमत्कार कर दिखाया था, तब प्रियंका के भाई राहुल गाँधी एक तरफ से आलू डालकर दूसरी तरफ से सोना निकाल रहे थे। अब अगर प्रियंका गाँधी एक तरफ से बस भेजकर दूसरी तरफ से मोटरसाइकिल, ऑटो-रिक्शा निकाल रही हैं तो फिर लोगों को इस से आखिर क्या समस्या है?

भाई-बहन

ऐसे चमत्कार कर दिखाने की यह प्रतिभा उसी सभ्यता की विरासत है, जिस सभ्यता की छुच्छी में कभी नेहरू जी ने आग लगाई थी। लेकिन गोदी मीडिया ने मन बना लिया है। गोदी मीडिया नहीं चाहती कि गाँधी परिवार अब किसी चमत्कार को अंजाम दे। यह चमत्कार की आवाज दबाने की फासीवादी ताकतों की साजिश नहीं तो फिर और क्या है?

कुछ दिन पहले ही आम आदमी के प्रायोजित प्रोपेगेंडाबाज ध्रुव राठी का कहना था कि भारत का दक्षिणपंथ रचनात्मक नहीं है और उसमें कल्पना की अच्छी क्षमता नहीं है। इसके साथ ही ध्रुव राठी ने लेफ्ट विंग को बेहद प्रतिभाशाली और रचनात्मक भी कहा था। वास्तव में प्रियंका गाँधी ने बसों को ऑटो-रिक्शा में तब्दील कर तुरन्त साबित कर दिया कि ध्रुव राठी गलत नहीं थे।

लालू ने तब किया था चमत्कार, जब ऐसा करना ‘कूल’ नहीं था

ऐसे समय में, जब दुनिया से चारा घोटाले की स्मृतियाँ धूमिल होने लगी थीं, प्रियंका गाँधी ने इस ऐतिहासिक काम को अपनी प्रेरणा बनाकर एक बेहतरीन संदेश दिया। यदि लोगों को ध्यान हो तो चारा घोटाले के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने यह कारनाम तब कर लिया था, जब ऐसा करना ‘कूल’ नहीं था।

लालू ने उस समय ट्रक के नंबर की जगह स्कूटर और मोपेड के नम्बर से फर्जी बिल डाले थे। लालू ने भैंसों और तमाम मवेशियों को स्कूटर और मोपेड आदि पर ढोकर भारतीय अर्थव्यवस्था में ‘किफायती’ शब्द का आविष्कार किया था।

हालाँकि, लालू फिर भी लालू थे। लेकिन ऐसे में यदि प्रियंका गाँधी इस विरासत में नई जान फूँकने और इसे जीवित रखने का प्रयास कर रही हैं तो राष्ट्रवादी ताकतें उन्हें ऐसा करने से भला रोक क्यों रही हैं?

आज देश में भय का ऐसा माहौल है कि बसें खुद को रिक्शा बताने को मजबूर हैं। बसों को यह भय है कि बहुसंख्यक ऑटो-रिक्शा के बीच उनकी हर सीट का रंग तलाशा जाएगा। ऐसे में अगर बसें खुद को ऑटो-रिक्शा ना बताएँ तो करें क्या? बसों के साथ इस समय देशभर में जो कुछ भी हो रहा है, उसे देखकर बस यही कहा जा सकता है कि –

रवीश कुमार जी वाह! KFC में बैठकर ...

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आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

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