हास्यास्पद यह है कि जितनी भीड़ वामपंथियों ने विरोध के लिए जुटाई थी और जितनी ऊँची आवाज में वो विरोध कर रहे थे, उससे कहीं अधिक जय श्री राम के नारे की गूँज सुनाई दे रही थी। वीडियो में वामपंथी विरोध की दम तोड़ती आवाज को सुनिए और मजे लीजिए।
कैम्पस नक्सलियों की हरकतों से ट्विटर पर कई प्रबुद्ध व्यक्तित्व बिफर उठे हैं। आदित्य राज कौल ने कहा है कि अवैध रूप से किसी को बंदी बनाना कानून के खिलाफ है। एएनआई सम्पादक स्मिता प्रकाश ने भी घटना की आलोचना की है। वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता ने जेएनयू को 'रिपब्लिक ऑफ़ जेएनयू' बताते हुए बेबस देश की......
वामपंथी छात्र नेता साकेत मून के आरोपों का जवाब देते हुए जेएनयू प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि जेएनयू कैंपस में सीआरपीएफ की तैनाती नहीं की गई है, कोई भी आकर देख सकता है। उन्होंने कहा कि छात्रों को गुमराह करने के लिए ऐसे दावे किए जा रहे हैं।
प्रोफ़ेसर कदम की पत्नी और छोटे बच्चे भी उस समय हेल्थ सेंटर में ही मौजूद थे, जब छात्र उन्हें इलाज के लिए बाहर नहीं ले जाने दे रहे थे। उनकी तबियत बिगड़ती ही जा रही थी और पत्नी लगातार तनाव में थीं। छात्र बीमार प्रोफेसर को ले जा रही एम्बुलेंस के सामने खड़े हो गए।
सरकारी वकील ने बताया कि दिल्ली सरकार से अब भी जेएनयू मामले में देशद्रोह का मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं मिली है। जबकि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 1200 पन्नों की चार्जशीट दायर कर रखी है।
आज कॉन्ग्रेस 'न्याय योजना' को लेकर बनर्जी का गुणगान करते नहीं थक रही। लेकिन, इंदिरा के जमाने में 250 लड़कियों सहित क़रीब 700 छात्र गिरफ्तार किए गए थे। अभिजीत बनर्जी पर 'हत्या की कोशिश' के आरोप लगाए गए थे।
JNU में '64 डेज ऑफ शटडाउन' नाम से विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया है। विरोध सभा में शेहला रशीद शोरा, एनी राजा, प्रदीपिका सारस्वत, संजय काक और एजाज अहमद राथर को वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया है।
जब वामपंथी संगठन AISA के छात्रों ने जितेन्द्र सिंह के भाषण के बीच में टोकाटाकी और नारेबाजी की, तो जवाब में ABVP वालों ने भी “कश्मीर से कन्याकुमारी, भारत माँ एक हमारी” का नारा लगाना शुरू कर दिया।
“केजरीवाल सरकार की नई स्कीम - आतंकवादी बनो, इनाम पाओ। 5 लाख रुपए और सरकारी नौकरी। दिल्ली में 5 साल में 40,000 बच्चे खोए। उनमें से केवल एक पर केजरीवाल मेहरबान। नजीब के बारे में चर्चा है कि वो आतंकवादी बन चुका है। फिर केजरीवाल सिर्फ एक परिवार पर मेहरबान क्यों?”
तुमने सत्ता में रह कर ऐसा क्या किया कि तुम्हें हर जगह से नकार दिया गया? फिलहाल 2-3 यूनिवर्सिटी तक सिमट चुके हो। वहाँ भी जब तुम छात्रसंघ जैसी संस्था के अध्यक्ष बन जाते हो, तो अपने विरोधियों के द्वारा बुलाए लोगों को कैम्पस में घुसने तक नहीं देते, हिंसा पर उतर आते हो! आखिर तुम किस लोकतांत्रिक तरीके की बात करते हो?