कोर्ट ने सारे सबूत देखते हुए माना कि इन दोनों ने दलित समाज के लोगों को प्रलोभन देकर सामूहिक धर्म परिवर्तन करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही विधि विरुद्ध ढंग से उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित कराया।
फराज ने संपत्ति पर कब्जा करने के उद्देश्य से उनकी बेटी को प्रेमजाल में फँसाया। उसने खुद को अविवाहित बताते हुए शादी का झाँसा दिया और बेटी का आर्थिक, मानसिक और शारीरिक शोषण किया।