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स्कूल कहकर मिशनरी बनवा रहे थे चर्च, भांडा फूटा तो बिहार के ग्रामीणों ने तोड़ा: ₹1000 हजार और शादी का लालच देकर बनाते थे ईसाई, 3 साल पहले भी छपरा में पकड़ा गया था मतांतरण का खेल

गाँव वालों का आरोप है कि ईसाई मिशनरी लोग उन्हें लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 163 (पहले सीआरपीसी की धारा 144) लागू कर दी।

बिहार के सारण जिले में छपरा के रिविलगंज इलाके में बुधवार (8 अप्रैल 2025) को कुछ गुस्साए लोगों ने एक निर्माणाधीन चर्च को तोड़ दिया। ये चर्च जसा टोला के वार्ड नंबर 10 में दलित गाँव में स्कूल की आड़ में बन रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि ईसाई मिशनरी लोग उन्हें लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 163 (पहले सीआरपीसी की धारा 144) लागू कर दी। मिशनरी संगठन ने शिकायत दर्ज कराई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस को जैसे ही चर्च में तोड़फोड़ की खबर मिली, वो मौके पर पहुँची और हालात का जायजा लिया। सारण के एसएसपी कुमार आशीष ने गुरुवार (9 अप्रैल 2025) को एक प्रेस रिलीज में बताया कि तोड़फोड़ में चर्च से एक बिजली का मीटर और दो सेंटरिंग प्लैंक हटाए गए। मिशनरी संगठन की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर एक ग्रामीण को हिरासत में भी लिया है।

एसएसपी ने कहा कि बुधवार (8 अप्रैल 2025) को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें इलाके में ईसाई धर्मांतरण की बात कही गई थी। गांव वालों की शिकायत पर थानेदार और सर्किल ऑफिसर ने जाँच शुरू की। पुलिस को अभी तक धर्मांतरण का कोई सबूत नहीं मिला, लेकिन मामला गंभीर होने की वजह से सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर, सदर-1 आगे जाँच कर रहे हैं।

जबरन धर्मांतरण में जुटे थे ईसाई मिशनरी

ग्रामीणों का आरोप है कि दो साल से चर्च का निर्माण चल रहा था। एक स्थानीय शख्स रामनाथ माँझी ने 3 अप्रैल 2025 को इसके खिलाफ शिकायत की थी। माँझी ने बताया कि जहानाबाद का ज्योति प्रकाश नाम का शख्स जमीन खरीदकर स्कूल बनाने की बात कह रहा था। ग्रामीणों ने भी स्कूल समझकर निर्माण में मदद की। लेकिन बाद में वहाँ चर्च का बोर्ड लगा देखकर सब चौंक गए। फिर मिशनरियों ने ग्रामीणों को ईसाई बनने के लिए लालच देना शुरू कर दिया। इससे लोग नाराज हो गए और चर्च के खिलाफ खड़े हो गए।

एक हजार रुपये के साथ होली वॉटर भी देते थे मिशनरी

रामनाथ माँझी ने बताया कि मिशनरी धीरे-धीरे निर्माणाधीन इमारत में आने लगे और हर रविवार को प्रेयर (प्रार्थना) करने लगे। जो भी प्रार्थना में शामिल होता, उसे लिफाफे में एक हजार रुपये दिए जाते। पैसे और राशन का लालच देकर लोगों को फँसाया जा रहा था। मिशनरियों ने कहा कि अगर वो ईसाई बन जाएँ तो उनकी बेटियों की शादी और बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाया जाएगा। साथ ही छठ पूजा जैसे हिंदू त्योहार मनाने से भी रोकने लगे।

ग्रामीणों का कहना है कि मिशनरियों ने उन्हें खास पानी की बोतलें दीं और 20 दिन तक पीने को कहा। ‘हालेलुइयाह’ बोलने की सलाह भी दी। एक स्थानीय महिला विद्यावती देवी ने बताया, “वो कहते थे कि अपने भगवान को पूजना छोड़ो, जीसस को मानो, तो दुख दूर हो जाएगा।”

पहले भी हो चुका है चर्च का विरोध

बता दें कि सारण में पहले भी धर्मांतरण का मामला सामने आ चुका है। साल 2022 में सदर प्रखंड के जटुआँ गाँव में एक चर्च का निर्माण किया जा रहा था, जिसका दलितों ने विरोध किया गया था। एक स्थानीय निवासी ने आरोप लगाया था कि हमें 1 लाख रुपए देने का लालच दिया गया था। ग्रामीणों के विरोध के चलते ईसाई मिशनरी से जुड़े लोग भाग खड़े हुए थे, वो सभी आंध्र प्रदेश के बताए जा रहे थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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