विषय

पत्रकारिता का समुदाय विशेष

हिंदुओं ने दिया मोदी को वोट, हिंसा और नफरत ही अब भारत का भविष्य: स्वरा भास्कर

'मोदी ग़ुफा' को मिलने वाली है रिकॉर्ड बुकिंग, लिबरल हिमालय की चोटियों से साझा करेंगे 'दुखी मन की बात'!

90 करोड़ वोटर लेकिन गायब हो गए 400 करोड़ के वोट – मीडिया गिरोह मिर्गी के कगार पर

मोदी विरोध में यह लोग दिमाग से इतने पैदल हो चुके हैं कि प्राइमरी स्कूल स्तर की गणित भी सर के ऊपर से उड़ रही है। इन्हें दिमाग का इलाज कराना चाहिए। ये लोग 2000 वोट को 20 लाख से गुणा भी नहीं कर पाते हैं और चले पत्रकारिता करने!

एग्जिट पोल और पुरषार्थ: फर्जी लिबरल गैंग वो शब्द इस्तेमाल कर रही है, जिसका अर्थ भी उसे नहीं पता

यही बात अगर किसी दक्षिणपंथी ने कह दी होती तो उसकी ऑनलाइन मॉब-लिंचिंग हो गई होती और महिला आयोग तक उसे घसीट लिया जाता।

साला ये दुःख काहे खतम नहीं होता है बे!

जो लोग रवीश की पिछले पाँच साल की पत्रकारिता टीवी और सोशल मीडिया पर देख रहे हैं, वो भी यह बात आसानी से मान लेंगे कि रवीश जी को पत्रकारिता के कॉलेजों को सिलेबस में केस स्टडी के तौर पर पढ़ाया जाना चाहिए।

एग्जिट पोल देख लिबरल गिरोह छोड़ रहा विष-फुंकार, गर्मी में निकल रहा झाग

जैसे-जैसे Exit Polls के नतीजे जारी हो रहे हैं, पत्रकारिता के समुदाय विशेष और फ़ेक-लिबरलों-अर्बन-नक्सलियों के सर पर ‘गर्मी चढ़नी’ शुरू हो गई है।

एडिटर्स गिल्ड की चुप्पी: लाख गाली खा लें, लेकिन चाटेंगे उन्हीं के… तलवे

चाहे बात रिपब्लिक टीवी के पत्रकारों पर हमले की हो, या मणिशंकर 'नीच' अय्यर जैसे व्यक्ति द्वारा पत्रकार को 'फ़क ऑफ़' कहने की, गुप्ता जी के लड़के के एडिटर्स गिल्ड को साँप सूँघ जाता है। इसलिए कि ‘दुधारू गाय की लात सहनी पड़ती है।’

स्क्रॉल डॉट इन: यहाँ मोदी-विरोध की खबरों का पंक्चर ठीक किया जाता है

जब ट्वॉयलेट पेपर खत्म हो जाता है तो आप ढूँढते हैं कि वो कहाँ रखा हुआ है। इसी क्रम में जब स्क्रॉल वेबसाइट पर यह देखने पहुँचा कि क्या इन्होंने ममता बनर्जी के बंगाल में हो रहे चुनावी हिंसा पर कुछ लिखा है? तो, कुछ नहीं मिला।

‘फैक्ट-चेकर’ ने छिपाया फैक्ट, मीडिया गिरोह ने फैलाया झूठ: मोदी इंटरव्यू पर प्रतीक सिन्हा की ‘नंगई’

आदरणीय(?) प्रतीक सिन्हा जी, इंटरव्यू ऐसे ही होता है- यही नियम है इंटरव्यू का कि कोई भी औड़म-बौड़म सवाल झटके में नहीं पूछा जा सकता। पत्रकारिता के समुदाय विशेष को “ब्रेकिंग न्यूज़” का माल मत परोसिए। यहाँ सबकी पोल-पट्टी खोली जाएगी।

हिन्दूफ़ोबिक द वायर, मंदिर में पूजा-पाठ और यज्ञ-हवन ही होते हैं

सेक्युलर प्रोजेक्ट के तहत सरकारें मंदिरों की मलाई काटने की तो हक़दार हैं पर उनसे उम्मीद यह की जाती है कि वे पूजा-पाठ में सीधा-सीधा विघ्न उत्पन्न करें।

The Print वालों, सीधे-सीधे बोलो हिन्दू प्रतीकों से सुलग जाती है (सीने में आग)

समुदाय विशेष वाले तब तक ‘बेचैन’ रहेंगे जब तक धर्म और संस्कृति, हिन्दू पंथ और सम्प्रदाय की हर अभिव्यक्ति बंद नहीं हो जाती। केवल सरकारी ही नहीं, निजी भी। यही हिन्दूफोबिया है। The Print वालों ने इस लेख से प्रोपेगेंडा को नई ऊंचाई दी है।

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें