समुदाय विशेष वाले तब तक ‘बेचैन’ रहेंगे जब तक धर्म और संस्कृति, हिन्दू पंथ और सम्प्रदाय की हर अभिव्यक्ति बंद नहीं हो जाती। केवल सरकारी ही नहीं, निजी भी। यही हिन्दूफोबिया है। The Print वालों ने इस लेख से प्रोपेगेंडा को नई ऊंचाई दी है।
विस्तारा ने कंपनी के दो सीनियर ऑफिसर्स को रिटायर्ड मेजर जनरल बख्शी के घर भेजकर माफी माँगने का सराहनीय कदम उठाया। इस पर बख्शी ने फेसबुक पोस्ट किया कि यह सैनिक की भावनाओं के लिए एक सम्मानजनक कदम है।
लायोनेल बार्बर अपने समाचारपत्र फाइनेंशियल टाइम्स की ओर से भारत के आम चुनावों को कवर कर रहे हैं। इसी दौरान अपने एक दौरे पर, लिखते हुए उन्होंने जयाप्रदा पर आजम की टिप्पणी का उल्लेख किया और लिखा, "कोई बुरा कथन नहीं है, हालाँकि इसके लिए खान पर अस्थाई प्रतिबंध लगा दिया गया।”
सिंह के ट्वीट के जवाब में गुणशेखर ने लिखा कि उन्हें कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के हलफ़नामे में खेद का कोई उल्लेख नहीं मिला। उनके इस ट्वीट के जवाब में लोगों ने स्क्रीनशॉट दे-देकर उन्हें खेद का उल्लेख दिखाना शुरू कर दिया।
पत्रकारिता के समुदाय विशेष का पसंदीदा देश है पाकिस्तान- और उसके खिलाफ मेजर जनरल बख्शी दो-दो युद्ध लड़ चुके हैं। यही नहीं, कारगिल के युद्ध में उनके सैन्य नेतृत्व का अभिनन्दन करते हुए उन्हें विशिष्ट सेवा पदक से भी नवाजा गया था। उनके बड़े भाई भी 1965 के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे।
मेजर जनरल बख्शी पाकिस्तान और आतंकवादियों के प्रति अपने कठोर रुख के लिए सम्मानित हैं, और इसीलिए ‘लिबरल’ धड़े में उन्हें नापसंद भी किया जाता है। लेकिन उनके यात्रा करने मात्र से विस्तारा में आगे से हवाई यात्रा न करने की धमकी देना तो पागलपन है भाई!