प्रदीप भंडारी रिपब्लिक टीवी के शो ‘ललकार’ को होस्ट कर रहे थे। इस दौरान जैसे ही उन्होंने इमाम को देशद्रोही और देश के लिए खतरा बताया, एक पैनलिस्ट पहले तो जोर-जोर से चिल्लाने लगा और फिर उनके साथ बदसलूकी भी की।
“पत्रकारिता एक कठिन दौर से गुजर रही है। फर्जी खबरें नए खतरे के रूप में सामने आई हैं, जिसका प्रसार करने वाले खुद को पत्रकार के रूप में पेश कर इस महान पेशे को कलंकित करते हैं।”
हैरान करने वाली बात ये है कि मृतका का पति भी एक पत्रकार ही है। दोनों ने अपनी मर्जी से (लव मैरेज) निकाह किया था। लेकिन, कुछ ही दिनों में रिश्तों में खटास आ गई।
POK में 22 अक्टूबर की तारीख को 'काला दिवस' (‘Black Day’) मनाया जाता है। उस ही तारीख को 1947 में पाकिस्तानी सेना ने महाराज हरी सिंह के जम्मू और कश्मीर राज्य पर हमला किया था।
मुजफ्फराबाद में एक दिन में पाक पुलिस का बर्बर चेहरा दूसरी बार सामने आया। पत्रकारों को न केवल पीटा गया, बल्कि उनके उपकरण भी तोड़ दिए गए। पत्रकारों ने जानबझूकर निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
ममता बनर्जी ने कहावत सुनी होगी कि जान है तो जहान है। अगर ईमानदारी से काम करने वाला पत्रकार ज़िंदा ही नहीं बचेगा तो ममता बनर्जी बताएँ कि उनकी ऐसी पेंशन किस काम की है?