'तलाक-ए-हसन' की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट ने जाँच के लिए आयोग को निर्देश दिए हैं। इस्लाम में इसे तलाक का सबसे बेहतर तरीका माना गया है, जिसे पैगंबर मुहम्मद ने भी कबूल किया है।
केरल हाई कोर्ट के जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपने फैसले में कहा कि मजहबी विश्वास व्यक्तिगत होते हैं और उन्हें दूसरों पर थोपने का अधिकार किसी को नहीं है।