पड़ताल में सामने आया कि अलग अलग चैनलों या अलग-अलग वक्त पर दिए गए बयानों में से शॉट्स लेकर ऑडियो क्लिप बनाई गई है। इस ऑडियो क्लिप में एक महिला के सवालों पर राजनाथ और अमित शाह के बयानों को ऐसे तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था कि जैसे पुलवामा आतंकी हमले की साजिश रची जा रही हो। जिसका पाकिस्तान ने भी भारत के खिलाफ प्रोपेगंडा चलाने के लिए इस्तेमाल किया था।
साइबर क्राइम की बात होने पर कानून और स्पष्ट कानूनी ढाँचे के अभाव में, प्रतीक सिन्हा जैसे लोगों का ऑनलाइन स्टॉकिंग और उत्पीड़न जैसे अपराधों में शामिल होने के बाद भी बच निकलना आसान हो जाता है।