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विज्ञान नहीं है पुरातत्व, राम मंदिर पर ASI की रिपोर्ट महज एक त्रुटियुक्त विचार: SC में वरिष्ठ वकील

वरिष्ठ वकील ने कहा कि चूँकि, आर्किओलॉजी एक नेचुरल साइंस नहीं है, इसके रिपोर्ट्स में यथार्थता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पुरातत्व विभाग ने अभी तक ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं दिया है, जिसे वेरीफाई किया जा सके। उन्होंने इसे त्रुटिपूर्ण और विरोधाभास भरा करार दिया।

अयोध्या में बाबर ने राम मंदिर बनवाया था? – 3 ​सूरतों पर गौर कर रहा है सुप्रीम कोर्ट

"अगर विवादित स्थल पर इतिहास में कोई मंदिर था तो वह कब गायब हो गया होगा, किसी को नहीं पता। यह ढाँचा 19वीं सदी तक भारत के किसी अन्य सामान्य मस्जिद की तरह ही था, विवाद के बाद यह चर्चित हो गया।"

रामायण में कहीं भी जन्मस्थान का जिक्र नहीं, 1949 से शुरू हुई पूजा: सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकार

मुस्लिम पक्षकार ने दावा किया कि जन्मस्थान अयोध्या में ही है लेकिन विवादित स्थल पर नहीं है, कहीं और है। इससे पहले मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि पूरे अयोध्या को ही जन्मस्थान माना जाता है और इसके बारे में कोई सटीक स्थान का जिक्र नहीं है।

…अल्लाह का सम्मान नहीं किया तो भारत के टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगे: सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्षकार

धवन ने कहा कि हिन्दू पक्ष सिर्फ़ यहाँ राम का जन्म होने की बात करते हैं, लेकिन उनकी अर्जी में कहीं भी उस क्षेत्र की बाउंड्री का जिक्र नहीं है। पूरी विवादित जमीन जन्मस्थान नहीं हो सकती। कुछ तो निश्चित स्थान होगा। पूरा क्षेत्र जन्मस्थान नहीं हो सकता।

बाबरी मस्जिद में हिंदू मजदूरों ने लिख दिए होंगे संस्कृत के श्लोक: सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्षकार

"1985 में राम जन्मभूमि न्यास बना और 1989 में केस दाखिल किया गया। इसके बाद सोची समझी नीति के तहत कार सेवकों का आंदोलन चला। विश्व हिंदू परिषद ने माहौल बनाया जिसके कारण 1992 में बाबरी मस्जिद गिरा दी गई।"

जम्मू-कश्मीर पर प्रोपेगेंडा को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज, J&K हाई कोर्ट ने भेजी रिपोर्ट

1. लोग उच्च न्यायालय तक अपनी शिकायत नहीं पहुँचा पा रहे हैं। 2. आर्टिकल 370 हटाने के बाद नाबालिगों को हिरासत में रखा जा रहा है। - इन दोनों आरोपों से संबंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट से रिपोर्ट मिल गई है। और इस रिपोर्ट के आधार पर...

हिन्दुओं के केंद्रीय गुंबद के नीचे पूजा करने का कोई सबूत नहीं: मुस्लिम पक्ष, जस्टिस भूषण ने जताई कड़ी आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट में वकील राजीव धवन ने मुस्लिम पक्ष की ओर से बहस को आगे बढ़ाते हुए दावा किया कि केंद्रीय गुंबद की पूरी कहानी ही 19वीं शताब्दी में गढ़ी गई थी। हिन्दुओं के केंद्रीय गुंबद के नीचे पूजा करने का कोई सबूत नहीं है।

अगले महीने राम मंदिर पर आ सकता है फैसला, 18 अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट में जिरह पूरी होने की उम्मीद

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या मामले की सुनवाई बहुत आगे पहुॅंच गई है। यदि पक्ष मध्यस्थता के जरिए मामला सुलझाने के इच्छुक हैं, तो वे ऐसा कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कलीफुल्ला की अगुवाई वाली मध्यस्थता पैनल के समक्ष हो रही सुनवाई गोपनीय रहेगी।

तुलसी बाबा ने यूॅं ही नहीं लिखा- झूठइ लेना झूठइ देना, झूठइ भोजन झूठ चबेना

सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन को केवल इस बात का सबूत चाहिए कि अयोध्या के किस खास जगह पर राम का जन्म हुआ था। वरना इकबाल के इमाम-ए-हिंद को वे भी याद करते हैं। कृपानिधान तो वाजिद अली शाह के भी राम ही थे। लेकिन, किसी ने न लिखा, न गाया। राम किस प्लॉट में पैदा हुए थे?

राम अयोध्या में तो पैदा हुए, लेकिन किस गली-मोहल्ले में, ये कैसे साबित होगा: मुस्लिम पक्ष

बाबरी मस्जिद सुन्नी वक़्फ़ के एकाधिकार में हमेशा से रही है। गर हिन्दू रामजन्मभूमि की सटीक जगह बता दें तो सुन्नी वक्फ बोर्ड श्रीरामजन्मभूमि से मस्जिद हटा लेगा।

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