पराशरण ने कहा कि अगर लोगों को विश्वास है कि किसी जगह पर दिव्य शक्ति है तो इसे न्यायिक व्यक्ति माना जा सकता है। उन्होंने कुड्डालोर मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है और केवल एक दीया जलता है जिसकी पूजा की जाती है।
कानून के दुरुपयोग और झूठे मुकदमों से बेहाल लोगों के बारे में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने बताया कि यह "मानवीय असफलता" ("human failure") के चलते होता है न कि जातिवाद या जाति व्यवस्था के चलते।
महाराष्ट्र सरकार ने अनुरोध किया था कि इस सम्बन्ध में किसी भी प्रकार का आदेश पारित करने से पहले उसकी बात सुनी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा के ख़िलाफ़ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार करते हुए इसे गंभीर मामला करार दिया था।
पराशरण ने बताया कि मूर्ति अपने-आप में भगवान नहीं है, लेकिन स्थापना के बाद उसमें दिव्यता आ जाती है। उन्होंने बताया कि ऐसी मूर्ति में स्थापित ईश्वर लोगों की भावनाओं और आस्थाओं का प्रतीक होते हैं।
उन्हें समर्पित की गई चल व अचल संपत्ति के भी वह स्वामी होते हैं।
CJI रंजन गोगोई ने पीठ का नेतृत्व करते हुए कहा कि 16 सितंबर को जम्मू कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत अब्दुल्ला के खिलाफ हिरासत का आदेश जारी होने के बाद इस याचिका पर विचार करने लायक कुछ भी नहीं बचा है।
"25 फरवरी को मैं आर्य समाज मंदिर गया। शुद्धिकरण समारोह के बाद मैंने हिन्दू धर्म अपना लिया। धर्म परिवर्तन के बाद मैंने और उसी दिन मंदिर में हिंदू संस्कारों और रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की। जिसमें 'सप्तपदी' और 'सात फेरे' आदि भी शामिल थे।"
आस्था नितांत निजी विषय है। सार्वजनिक जीवन और समाज जिस तर्क और भौतिक नियम से चालित होते हैं, उनसे आस्था समेत निजी विषयों के नियम-कानून नहीं बन सकते। नियम सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए होते हैं जो समाज और सार्वजनिक क्षेत्र में लागू होते हैं।
कॉन्ग्रेस के 13, जदएस के 3 और एक स्वतंत्र विधायक को कर्नाटक विधान सोउधा (विधान सभा) के तत्कालीन अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने जुलाई में सदन के लिए अयोग्य करार दिया था। इन विधायकों के हट जाने से एचडी कुमारास्वामी की कॉन्ग्रेस-जदएस सरकार गिर गई थी.....
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर 18 अक्टूबर तक बहस पूरी करने का आदेश दिया है। सीजेई के मुताबिक अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर चार हफ्ते के अंदर कोई फैसला लेना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।