"मेरी हालत बहुत ख़राब है और मैंने पाकिस्तान और दुनियाभर में कई लोगों से मदद की गुहार लगाई है लेकिन अभी तक मुझे कोई मदद नहीं मिली है। हालाँकि, पाकिस्तान में कई क्रिकेटरों की समस्याओं को सुलझाया गया है। मैंने एक क्रिकेटर के नाते पाकिस्तान के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और मुझे इसका गर्व है।"
इस खुलासे के बाद पूरे मामले में नया मोड़ आ गया। जहाँ अभी तक कॉलेज प्रशासन कह रहा था कि नमृता की मौत आत्महत्या है, वहीं फॉरेंसिक लैब से आई ब्लड सैंपल की रिपोर्ट किसी दूसरी ओर ही इशारा कर रही है।
थक हारकर कुछ दिन पहले पाक हिन्दू परिवार ने इंसाफ के लिए दिल्ली के हाई कोर्ट का रुख किया था। उनकी ओर से वकील अशोक अग्रवाल ने अदालत में याचिका डाली थी। जिसपर संज्ञान लेते हुए आज अदालत ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया।
पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट में नमृता की मौत के कारणों को नहीं बताया गया है, उसमें कहा गया है कि सबूतों से मालूम चलता है कि उन्होंने आत्महत्या ही की। लेकिन इस बात के कोई सबूत नहीं मिले जिससे पता चले उनकी हत्या हुई।
जयपुर के एक होटल ने एक जोड़े को रूम देने से सिर्फ़ इसीलिए मना कर दिया क्योंकि वो दोनों अलग-अलग धर्म से ताल्लुक रखते हैं। उक्त पुरुष मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखता है तो महिला हिन्दू है। होटल के रिसेप्शन पर दोनों को कहा गया कि उन्हें चेक-इन नहीं करने दिया जाएगा लेकिन क्योंकि दोनों अलग-अलग धर्म से हैं।
पाकिस्तान ने हिन्दुओं की आस्था का एक बार फिर से अपमान किया है। पाकिस्तान की सरकार ने एक हिन्दू दम्पति को PoK स्थित माँ शारदा पीठ के दर्शन के लिए अनुमति तो दे दी लेकिन मन्दिर में जाने से रोक दिया। उन्हें मन्दिर के पास की नदी में ही पूजा-अर्चना कर लौटना पड़ा।
पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों को अगवा कर इस्लाम कबूल करवाने का सिलसिला पुराना है। ऐसे ज्यादातर मामलों में पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं करती। इसके कारण आबादी 15 साल में घटकर 8 हजार हो गई है।
एनआरसी में जिन 19 लाख लोगों का आँकड़ा निकाला गया है, उसमें से अधिकांश हिन्दू ही हैं। जिन 19 लाख लोगों को एनआरसी से बाहर किया गया है, उनकी अपील को अगर फोरेनर ट्रिब्यूनल ने ठुकरा दिया तो उन्हें लम्बी कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ेगी।
DMK ने कमिश्नर से मरीदास की शिकायत की है क्योंकि वह सवाल पूछते हैं, ब्लॉग लिखते हैं, मोदी का समर्थन करते हैं और वीडियो बनाते हैं। सारे FOE वाले सोए हुए हैं। समझिए इस विवाद के बारे में और जानिए कौन हैं मरीदास? क्यों ट्रेंड हो रहा है #ISupportMaridhas ?
जिला प्रशासन का यह फैसला उस समय आया है जब कुछ दक्षिण पंथी समूहों द्वारा सड़कों पर मुस्लिमों के नमाज पढ़े जाने के विरोध में आरती और हनुमान चालीसा से जुड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाने लगा।