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बच्चे के लिए 7 साल 9 महीने का इंतजार, आतंकियों ने 4 घंटे में छीनी जिंदगी: काबुल हमले से जैनब की गोद सूनी

काबुल में अस्पताल पर हुए आतंकी हमले ने जैनब की गोद फिर से सूनी कर दी है। गोद भरने के लिए उसने करीब सात साल इंतजार किया...

रमजान के महीने में 1 दिन में 2 बड़े आतंकी हमले: 2 नवजात समेत 40 लोगों की मौत, 60 घायल, ISIS ने ली जिम्मेदारी

आतंरिक मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक आर्यन ने ISIS द्वारा किए गए इन हमलों की निंदा करते हुए पूरी घटना को मानवता और अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया है।

अफगानिस्तान: राष्ट्रपति भवन के 20 कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव, दहशत न फैले इसलिए दबाई जा रही खबर

बताया जा रहा कि एक सरकारी महकमे से राष्ट्रपति भवन संक्रमित फाइल पहुॅंची। इसी फाइल के संपर्क में आने से कर्मचारी संक्रमित हुए।

काबुल गुरुद्वारा अटैक: मास्टरमाइंड ISKP सरगना मौलवी अब्दुल्ला गिरफ़्तार, 4 अन्य पाकिस्तानी भी दबोचे गए

मौलवी अब्दुल्ला ने पूरे हमले की साजिश रची थी। वह पाकिस्तानी नागरिक है और पहले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था। इसके बाद वो तहरीक-ए-तालिबान में सक्रिय रहा। फिर आईएसकेपी का प्रमुख बना। हमले में 27 लोगों की मौत हो गई थी।

अफगानिस्तान से एयरलिफ्ट किए जाएँ सिख: काबुल गुरुद्वारे हमले के बाद मोदी सरकार से कैप्टन

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में 25 मार्च को गुरुद्वारे पर आातंकी हमला हुआ था। हमले के वक्त वहॉं 150 श्रद्धालु मौजूद थे। 27 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि आठ अन्य घायल हो गए थे।

97000 सिखों और हिंदुओं का सफाया… वो भी सिर्फ 29 साल में! आतंकी हमले आम, मानवाधिकार बेमानी है अफगानिस्तान में

अमेरिका के स्टेट्स डिपार्टमेंट और मीडिया के अनुसार 1990 में वहाँ 1 लाख हिन्दू और सिख आबादी थी, जोकि अब 3000 के आसपास है। यह समझना कोई कठिन काम नहीं है कि उन 97,000 हिन्दुओं और सिखों के साथ क्या हश्र हुआ होगा।

मेरी 3 साल की बेटी के सिर में गोली मारी, वो बार-बार बोल रही थी- डैडी मुझे बचा लो…

एक बच्ची जो 10 दिन बाद अपना चौथा जन्मदिन मनाने वाली थी, उसे भी आतंकियों ने मौत के घाट उतार दिया। उस पिता पर क्या गुजरी होगी जिसके ऊपर उसकी नन्ही बेटी का ​शव आकर गिरा होगा।

क्या अफगान-तालिबान शांतिवार्ता की घुटन का परिणाम है ISIS द्वारा गुरूद्वारे पर हमला, भारत में लिबरल-वामपंथी गिरोह की चुप्पी के मायने?

कल गुरूद्वारे पर हमले के बाद पूरा अफगानिस्तान अपने सिख-हिन्दू भाइयों के लिए उमड़ पड़ा और अपनी सहानुभूति व्यक्त कर उसके साथ खड़े होने की दृढ़ता दिखाई। इस हमले पर अभी तक तालिबान की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस्लामिक स्टेट ने इसकी जिम्मेदारी लेकर एक बार फिर अपना घिनौना चेहरा दुनिया के सामने रख दिया। इधर भारत में लिबरल-वामपंथी गिरोह इसको लेकर चुप्पी साधे हुए है। जैसे उसने सुकमा में नक्सली हमले के वक्त साधा था।

‘इनका कसूर सिर्फ इतना है कि ये सिख हैं, ये उस मजहब के नहीं जिससे आतंकी आते हैं’

"भारत में कुछ लोग इनके प्रवेश का विरोध करते हैं। इन्हें नागरिकता देने की बात पर राजनीति साधते हैं। वे चाहते हैं कि आतंकियों को भी नागरिकता दी जाए ताकि वे यहाँ उनका पालन कर सकें और हत्याएँ जारी रख सकें।"

गुरुद्वारे पर IS का हमला: 27 की मौत, 6 घंटे की मुठभेड़ के बाद 4 आतंकी भी मार गिराए गए

हमला सुबह-सुबह हुआ। उस समय अरदास के लिए गुरुद्वारे में छोटे बच्चों समेत करीब 150 लोग मौजूद थे। मोहन सिंह ने बताया कि गोली चलने की आवाज सुन उन्होंने खुद को टेबल के नीचे छिपा लिया। अचानक धमाका हुआ और छत का एक टुकड़ा उन पर आ गिरा।

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