बांग्लादेशियों द्वारा BSF के जवानों को निशाना बनाने का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले पश्चिम बंगाल में तो बांग्लादेशियों ने एक जवान के हाथ पर बम फोड़ दिया था, जिससे अनीसुर रहमान नामक बीएसएफ जवान का हाथ कोहनी से फटकर ही नीचे गिर गया था।
महिला का अपहरण जबरन इस्लामी धर्मान्तरण कराने के मकसद से किया गया। ये घटना तब हुई, जब वह अपने पिता के घर गई थी। उसका अपहरण करने वाले तीनों आरोपित हैं- मोहम्मद नाहिद हसन, मोहम्मद नसीर हैदर और मोहम्मद सबुज।।
रोजाना 300-400 लोग भारत से बांग्लादेश लौट रहे हैं। अधिकांश लोगों ने वहॉं की एजेसियों को बताया है कि वे काम के सिलसिले में अरसे से भारत में रह रहे थे। इनके पास से भारतीय पहचान पत्र भी बरामद हुए हैं।
हिंसा में शामिल बांग्लादेशी घुसपैठिए सीमापुरी में छिपकर रह रहे थे। जुमे की नमाज के बाद भड़की हिंसा के दौरान जमकर उत्पात मचाया गया था। उपद्रवियों ने पुलिस पर हमले भी किए थे।
बीजीबी के महानिदेशक ने बताया है कि 2019 में अवैध रूप से सीमा पार करने पर 1000 लोगों को बांग्लादेश में गिरफ्तार किया गया। इनमें 445 नवंबर-दिसंबर में आए। पहचान कराने पर सभी घुसपैठियों के बांग्लादेशी होने की बात सामने आई।
"मेरी माँ ने 'डायरेक्ट एक्शन डे' के दौर को तब देखा था, जब वह एक बच्ची थीं और उन्हें गहरा आघात पहुँचा था। उन्होंने देखा था कि पार्क सर्कस में अपने घर के पास मुसलमानों द्वारा एक हिन्दू को कैसे मार दिया गया था।"
मोहम्मद बिलाल लखनऊ में ट्रेन पर चढ़ा था और कोलकाता जा रहा था, जहाँ से उसकी बांग्लादेश जाने की योजना थी। बिलाल का बड़ा भाई लखनऊ की जेल में बंद है। बिलाल के पास से तीन बांग्लादेशी पासपोर्ट, बांग्लादेशी मुद्रा और अमेरिकी डॉलर जब्त किए गए हैं।
NRC का जो विरोध है, वो दरअसल प्रदर्शन है संख्या बल का। वो दिखा रहे हैं कि “देखो, जहाँ-जहाँ हमारी संख्या थोड़ी भी अधिक है, वहाँ-वहाँ हम तोड़-फोड़ कर सकते हैं, आग लगा सकते हैं, पुलिसकर्मी को मार सकते हैं।” उनका संदेश स्पष्ट है कि वो अगर संख्या बल में अधिक हैं तो...
NRC और CAA को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए इसका असर संबंधों पर पड़ने की खबरों को खारिज किया है। साथ ही भारत को हमेशा से सहिष्णु और धर्मनिरपेक्षता में यकीन करने वाला मुल्क बताया है।