झारखंड के संथाल परगना में जनजातीय समाज ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अभियान छेड़ा है। अब गाँव-गाँव डुगडुगी बजाकर लोग जमीन और बेटियाँ न सौंपने का संकल्प ले रहे हैं।
असम ने जब बांग्लादेशी नागरिकों को बाहर निकालने के लिए आंदोलन शुरू किया तो 22 साल के खरगेश्वर तालुकदार का बलिदान पहला दर्ज किया गया। इसी दिन को याद करते हुए शहीद दिवस मनाया जाता है।
जबलपुर में सैकड़ों रोहिंग्या-बांग्लादेशी परिवार का पता चला है। ये लोग सरकारी जमी पर कब्जा कर सालों से रह रहे थे। मध्य प्रदेश में SIR की कवायद से खुलासा हुआ।