इस मामले में हिंदू और मुस्लिम पक्षों के सलाह-मशवरे के बाद के परासरन, सीएस वैद्यनाथन और राजीव धवन ने दलीलें ख़त्म करने के लिए अनुमानित समय का ज़िक्र किया। पाँच जजों वाली संविधान पीठ ने...
जम्मू-कश्मीर पर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा अनुच्छेद 370 के निरस्त हो जाने के बाद से एक गोली भी नहीं चलाई गई। केंद्र ने बताया कि प्रदेश के 88 प्रतिशत से अधिक थाना क्षेत्रों से प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। फिलहाल, कुछ स्थानीय प्रतिबंध लगे हैं।
सीजेआई रंजन गोगोई ने अनुच्छेद 370 के फैसले के खिलाफ़ दायर याचिका पर वकील एमएल शर्मा से सुनवाई के दौरान पूछा कि ये किस तरह की याचिका है? और इसमें क्या फाइल किया गया है? याचिका लें और दूसरी याचिका दाखिल करें।
इससे पहले यह मामला मई 2019 में सामने आया था जब सुप्रीम कोर्ट ने एक दायर जनहित याचिका के आधार पर सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह, आनंद ग्रोवर और उनके एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ को एक नोटिस जारी किया था। यह नोटिस प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने जारी किया था।
केंद्र सरकार ने ग़ैर सरकारी संगठन के FCRA लाइसेंस को रद्द कर दिया था, लेकिन दोषी व्यक्तियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि इनके द्वारा जुटाए गए धन का राष्ट्र के ख़िलाफ़ गतिविधियों में दुरुपयोग किया गया।
महिला ने कहा कि उसके परिवार वालों से प्रतिशोध लिया जा सकता है और किसी भी प्रकार के हमले किए जा सकते हैं। महिला के अनुसार, कमिटी ने पीड़िता को जाँच रिपोर्ट की कॉपी देने से भी इनकार कर दिया है। जस्टिस गोगोई ने कहा था कि इसके पीछे बहुत बड़ी ताक़तें हैं जो सीजेआई के पद को निष्क्रिय करना चाहते हैं।
एंटी करप्शन काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने अपने वकीलों के माध्यम से, इस आधार पर मामले की तत्काल सूची के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया कि CJI के ख़िलाफ़ आरोपों का प्रसारण और प्रकाशन "भारतीय न्यायिक प्रणाली पर सीधा हमला है।"
कोर्ट ने इस मामले में बड़ी साजिश का इशारा करते हुए कहा कि इसके पीछे बड़े और ताक़तवर लोग हो सकते हैं, लेकिन वे (साजिशकर्ता) जान लें कि वे आग से खेल रहे हैं।
वकीलों के एसोसिएशन ने आरोपों की निष्पक्ष जाँच के लिए फुल कोर्ट की अध्यक्षता में कमिटी गठन करने की माँग की है। वहीं दूसरी ओर न्यायालय के कर्मचारी कल्याण संगठन ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई का समर्थन किया है।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपने खिलाफ यौन उत्पीड़न का दावा करते हुए दाखिल किए गए शपथपत्र को हास्यास्पद करार दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ बड़ी ताकतें अगले हफ्ते सुनवाई होने वाले महत्वपूर्ण मुकदमों से पहले उन्हें असहज करके न्यायपालिका को अस्थिर बनाना चाहती हैं।