यह किसी से छुपा नहीं है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को हटाने के लिए स्वरा भास्कर ने सारी हदें पार कर दी थीं, ट्विटर पर लोगों ने स्वरा को टारगेट करके पनौती तक लिख दिया था।
इसी मामले को लेकर पार्टी के कुछ नेताओं ने आनन-फानन में प्रेस कांफ्रेंस कर पीसी चाको के इस्तीफे की भी माँग की है, मगर इस पूरे मामले की जड़ यानी जिस चिट्ठी के चलते पूरा विवाद शुरू हुआ है उसमें ऐसा क्या लिखा है इस मुद्दे पर दोनों में से किसी ने भी अभी तक खुलकर कोई बात नहीं कही है।
सांसद राजेश मिश्रा ने पार्टी को देश के मौजूदा राजनीतिक परिवेश में आत्ममंथन करने की सलाह देते हुए महासचिव प्रियंका गाँधी के सलाहकार का दायित्व संभालने से इनकार कर दिया है। राजेश मिश्रा ने कहा कि उनकी हैसियत प्रियंका गाँधी को सलाह देने की नहीं है ।
ब्रिटिश होने के बावजूद टली भारत की वास्तविकताओं को उस राजनीतिक दल से कहीं अधिक समझते हैं जिसने दशकों तक देश पर शासन किया है। जिस हकीकत को टली जैसे विदेशी समझ लेते हैं वह कॉन्ग्रेस क्यों नहीं समझ पाती है, ये पूरी तरह से समझ से परे है।
लांबा ने बीते दिनों ट्वीट कर कहा था, "आम आदमी पार्टी में सम्मान से समझौता करके रहने से बेहतर है कि मैं पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दूँ और अगला चुनाव चाँदनी चौक विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लडूँ।"
पिछले दिनों जयराम रमेश ने कहा था कि पीएम मोदी के शासन का मॉडल पूरी तरह नकारात्मक गाथा नहीं है। उनके काम को स्वीकार नहीं करना और हर समय खलनायक की तरह पेश कर कुछ हासिल नहीं होने वाला है। सिंघवी और थरूर ने उनके बयान का समर्थन किया था।
‘‘टेलीफोन टैपिंग के मुद्दे पर कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता सिद्दरमैया समेत कई नेताओं ने कहा कि इसकी जाँच होनी चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए, इसलिए मैंने सीबीआई जाँच का आदेश देने का फैसला किया है।”
‘‘गाँधी परिवार से बाहर किसी व्यक्ति का पार्टी का नेतृत्व करना वास्तव में मुश्किल होगा। राजनीति में भी ‘ब्रांड इक्विटी’ होती है। अगर आप अभी भाजपा को देखेंगे तो क्या मोदी और शाह के बिना वह सुचारू रूप से चल सकती है? जवाब है नहीं। इसी तरह...”
इस बयान को लेकर सोशल मीडिया में लोगों ने चिदंबरम को आड़े हाथों लिया है। यूजर्स ने कहा है कि पार्टी के गर्त में पहुॅंचने के बाद भी कॉन्ग्रेसी सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। कुछ लोगों ने कॉन्ग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति पर सवाल उठाए हैं, तो कुछ ने चिदंबरम से पूछा है कि यदि जम्मू-कश्मीर हिन्दू बहुल राज्य होता तो क्या नेहरू आर्टिकल 370 की सौगात देते?
"यह परिक्रमा राहुल गाँधी से शुरू होकर सोनिया गाँधी तक और सोनिया गाँधी से शुरू होकर राहुल गाँधी पर जाकर खत्म होती है। ये दर्शाता है कि कॉन्ग्रेस के लिए राहुल गाँधी एक बड़ी भूल हैं।"