7 अगस्त 2008 को सोनिया गाँधी की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस और चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के बीच एक समझौता हुआ था। शायद आज वही वजह है कि कॉन्ग्रेस चीन की नापाक हरकतों पर भी चुप्पी साधे हुए है।
इस एक ट्वीट में इतना खोखलापन और इतनी धूर्तता है कि फिर से आदमी सोचने लगता है, क्या राहुल गाँधी ये लिख सकता है? सतही तौर पर यह ट्वीट तो एक चिंतित व्यक्ति का दिखता है, लेकिन ऐसा है नहीं.......
कॉन्ग्रेस पार्टी भी अच्छा काम कर रही है, लेकिन समय-समय पर पुरानी खटिया रह-रह कर कुरकुर की आवाज करती है। खटिया पुरानी है लेकिन इसकी एक ऐतिहासिक विरासत है।
जो आंबेडकर, जगजीवन राम, सीताराम केसरी के साथ हुआ वही 2014 में नरेंद्र रावत के साथ हुआ था। अब फूल सिंह बरैया के साथ हुआ है। समय बदला पर कॉन्ग्रेस का दलितों के साथ व्यवहार नहीं।