पूर्व सांसद संतोष सिंह, पूर्व एमएलसी सिराज मेहँदी, यूपी के पूर्व गृहमंत्री रामकृष्ण द्विवेदी, पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी, पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्रा, पूर्व विधायक नेकचन्द्र पाण्डेय, पूर्व विधायक हाफ़िज़ मोहम्मद उमर, पूर्व विधायक विनोद चौधरी के साथ-साथ...
विपक्षी दलों ने संसद के संयुक्त सत्र का बहिष्कार करते हुए महाराष्ट्र मामले को लेकर प्रदर्शन किया। इसमें कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह भी शामिल हुए।
“कॉन्ग्रेस को महाराष्ट्र के मुद्दे पर दिक्कत हो रही है। इसीलिए उन्हें बार-बार सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ रहा है। लेकिन उनको शायद याद नहीं है कि राजस्थान में सहयोगी पार्टी होने के बावजूद बसपा के सभी विधायकों को उन्होंने तोड़ लिया था, तब उन्हें संविधान की याद नहीं आ रही थी।”
कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा है कि वे हमेशा सोचते हैं कि अगर अमेरिका में मुंबई जैसा हमला होता तो वह पाकिस्तान का बुरा हाल करता। मनमोहन सरकार ने 26/11 के बाद वैसी सख्ती नहीं दिखाई थी, जिसकी उस वक़्त दरकार थी।
जिस उद्धव ठाकरे के विधायक आज सोनिया गाँधी के नाम पर शपथ ले रहे हैं, उन्होंने ही कभी जवानों के अपमान का आरोप लगा कर राहुल गाँधी से पूछा था कि वो 26/11 के वक़्त कहाँ थे? 26/11 के बाद चर्चित रही थी राहुल गाँधी की 'पार्टी ऑल नाइट' और प्रियंका के बेतुके बयान।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने 154 विधायकों के समर्थन का दावा किया। वहीं, शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने बताया कि गवर्नर को 162 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा गया है। संजय राउत 175 का दावा करते रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र के सियासी संकट पर सुनवाई के दौरान भाजपा का पक्ष रखते हुए मुकुल रोहतगी ने कहा कि चुनाव नतीजे आने के बाद शिवसेना और भाजपा में मतभेद गहरा गए। इसके बाद अजित पवार ने उन्हे समर्थन देने की बात कही थी।
वह सरकार कितनी अनैतिक थी इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि जो डिप्टी सीएम बना था, उसने सीएम की पार्टी से बगावत कर ही चुनाव जीता था। वे सीएम के बेटे को ही हराकर विधानसभा पहुॅंचे थे।
महाराष्ट्र में सरकार गठन के मुद्दे पर कॉन्ग्रेस समेत विपक्ष ने सदन में जबर्दस्त हंगामा किया। जिसके बाद स्पीकर ने मार्शल को कॉन्ग्रेस के दो सांसदों- टीएन प्रथापन और हीबी इडेन को बाहर निकालने का आदेश दिया।
सिंधिया के नए ट्विटर बॉयो में उनके कॉन्ग्रेस से जुड़े होने का कोई संकेत नहीं है। इससे पहले, उनके प्रोफाइल में गुना से 2002-2019 तक सांसद रहने का जिक्र था। साथ ही उन महकमों का भी जिक्र था जिसकी जिम्मेदारी मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान उन्होंने सॅंभाली थी।