सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक स्पीकर रमेश कुमार के उस आदेश को जायज़ ठहराया है, जिसमें इन 17 विधायकों को निलंबित करने का आदेश दिया गया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी विधायकों के आगामी उप-चुनाव लड़ने के लिए योग्य करार देकर उन्हें राहत प्रदान की है।
स्पेशल वीवीआईपी सिक्योरिटी यूनिट के कमांडोज़ की एक टुकड़ी राहुल गाँधी के तुग़लक़ लेन स्थित आवास पर तैनात है। प्रियंका गाँधी के लोधी एस्टेट घर की सुरक्षा-व्यवस्था भी दूसरी टीम ने सॅंभाल ली है।
कृषि राज्य मंत्री के साथ सांसद हनुमान बेनीवाल भी थे। कहा जा रहा है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के निशाने पर बेनीवाल ही थे। उन्होंने हाल ही में राज्य के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।
कॉमन मिनिमम प्रोग्राम से स्पष्ट है कि शिवसेना ने हिंदुत्व के एजेंडे पर समझौता किया है। वह वीर सावरकर को भारत रत्न देने की माँग से पीछे हट गई है। मुस्लिमों को अतिरिक्त आरक्षण पर भी उसे आपत्ति नहीं रही।
कॉन्ग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को कहा है कि अगर महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस सरकार में शामिल होने में विफल रहती है तो राज्य में पार्टी का अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा। हालाँकि, कॉन्ग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के विधायकों की राय का विरोध किया और...
चारों मुख्य पार्टियों भाजपा, कॉन्ग्रेस, एनसीपी और शिवसेना में सबसे कम यानी केवल 44 विधायक कॉन्ग्रेस के जीते हैं, और राज्यपाल के राष्ट्रपति शासन से पहले की मीटिंग में न बुलाने पर बिफ़र ऐसे रहे हैं मानो बैठक में होते तो दावा सीएम की दावेदारी का पेश कर देते!
"कॉन्ग्रेस हमेशा ही देश से पहले पार्टी को तवज्जो देती है। कॉन्ग्रेस, बीजेपी को महाराष्ट्र ‘थाली में सजाकर’ दे रही है। महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर कॉन्ग्रेस की शिथिलता से सिद्ध हो गया कि कॉन्ग्रेस के खात्मे का समय आ गया है।"
शिवसेना ने एक बड़ी कीमत चुकाई है। जिसकी सरकार को बाला साहेब ने हिजड़ों का शासन कहा उसके सामने झुकना पड़ा। मातोश्री अब 'मातेश्री' का शरणागत है। फिर भी हासिल कुछ नहीं हुआ।
राजस्थान में (जहाँ कॉन्ग्रेस का शासन है) इतिहास की पाठ्य पुस्तकों से उनके नाम से 'वीर' हटा दिया गया और अब इतिहासकारों की स्वायत्त संस्था ICHR को राजस्थान यूनिवर्सिटी ने कह दिया है कि यूनिवर्सिटी कैम्पस में सावरकर छोड़ कर किसी भी विषय पर सम्मेलन हो सकता है।
NCP के एक नेता का कहना है कि जब तक तीनों पार्टियाँ- कॉन्ग्रेस, NCP और शिवसेना, सरकार में शामिल नहीं हो जातीं, तब तक कोई स्थिरता नहीं आएगी। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस सरकार का हिस्सा हो।"