सुभाष चोपड़ा 1968 में छात्र राजनीति से शुरुआत करने के बाद कॉन्ग्रेस की ओर झुकाव लेकर सक्रिय राजनीति में आए। 1970-71 में वे दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुए। इसके बाद सुभाष दिल्ली कॉन्ग्रेस के सचिव, खजांची और महासचिव के अलावा उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।
दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में कॉन्ग्रेस के चुने हुए 45 नेता भाग ले रहे हैं। शिविर से जुड़ी सूचनाएँ या तस्वीर लीक न हो इसके लिए सभी नेताओं से मोबाइल फोन पहले ही ले लिए गए हैं।
विधानसभा के दौरान 18 ऐसे नेता थे, जिन्हें कॉन्ग्रेस ने पार्टी-विरोधी गतिविधियों में संलग्न रहने का आरोप लगा कर 6 साल के लिए निकाल बाहर किया था। वहीं अशोक तँवर को लेकर पार्टी ने अभी तक स्थिति साफ़ नहीं की है, जिन्होंने चुनाव के दौरान जम कर जेजेपी का प्रचार किया।
5 बार सांसद और 2 बार विधायक रहे लक्ष्मण सिंह इससे पहले किसान कर्जमाफी पर पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी को भी घेर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि क़र्ज़माफ़ी किसी भी क़ीमत पर संभव नहीं है। इसके लिए राहुल गॉंधी को माफी मॉंगनी चाहिए।
पार्टी छोड़ने वाले कॉन्ग्रेस और झामुमो के विधायक पिछले एक महीने से भाजपा के संपर्क में थे। झामुमो छोड़ने वाले जेपी पटेल के मुताबिक अब वे सब मिलकर महागठबंधन या ठगबंधन को सबक सिखाएँगे।
सिंघवी को कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता का फोन गया था और उनसे ट्वीट के कथ्य और इसकी टाइमिंग पर सवाल किए गए। कहा जा रहा है सिंघवी को ये कॉल सोनिया गाँधी के कहने पर किया गया, जो कि सिंघवी के ट्वीट से नाराज दिखीं।
“हम मानते हैं कि जनता ने हमें सरकार बनाने का आदेश नहीं दिया है। कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन करना हमारी मजबूरी थी। अकेले चुनाव लड़ना संभव नहीं था। इस चुनाव में पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, सीएम फडणवीस और उद्धव ठाकरे ने काफी मेहनत की है।”