2013 में बिहार के बोधगया मंदिर में बम धमाके के मास्टरमाइंड आतंकवादी आतंकी संगठन के 6 साल से फरार चल रहे आतंकवादी को पुलिस ने हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया है।
चुनाव के दौरान राहुल गॉंधी ने अडानी को एक रुपए प्रति मीटर की दर से 35 हजार एकड़ जमीन देने का आरोप मोदी पर लगाया था। अब उन्हीं अडानी को लुभाने के जतन में कॉन्ग्रेस सरकार लगी है।
कर्नाटक के पूर्व डिप्टी सीएम और कॉन्ग्रेस नेता जी परमेश्वर के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी के बाद अब तक 4.52 करोड़ रुपए की नक़दी बरामद हुई थी। कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री के क़रीब 30 ठिकानों पर आईटी विभाग ने छापे मारे।
सुमन गुर्जर अपने वार्ड में विकास कार्यों के एवज में ठेकेदार से 3 प्रतिशत कमीशन मॉंग रही थी। ठेकेदार ने पहले 50,000 रुपए दिए। रिश्वत की दूसरी किस्त लेते वक़्त एसीबी की टीम ने रंगे हाथों सुमन गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया।
ज्योतिरादित्य की गिनती भी उन नेताओं में होती है जो राहुल के करीबी रहे हैं। तो क्या अगली बारी उनकी ही है? जिस दौर में नेताओं को निष्ठा बदलने में पल भर की देरी नहीं लगती है, उस वक़्त में ज्योतिरादित्य के लिए तो यह दादी के घर वापसी जैसा ही होगा।
पूर्व विदेश राज्य मंत्री और संयुक्त राष्ट्र राजनयिक रह चुके कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने विदेश मामलों की संसदीय प्रवर समिति (स्टैंडिंग कमिटी) से अपना नाम वापस ले लिया है। इसका कारण उन्होंने संसद की ही दूसरी, सूचना प्रौद्योगिकी समिति के कार्यों में व्यस्तता को कारण बताया है।
साल 2019 के विधानसभा चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस ने गत वर्ष के विधानसभा चुनावों में भी राजस्थान और मध्यप्रदेश की जनता से कई तरह के वादे किए थे। लेकिन नतीजा आज सबके सामने हैं। किसान अब भी ऋण माफी की गुहार लगा रहे हैं और महिलाएँ अब भी वहाँ असुरक्षित हैं।
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि राज्य के भाजपा नेता पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग कर रहे हैं। यदि स्थिति ऐसी होती है, और समय की माँग है, तो निश्चित रूप से राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए।
“किसानों का कर्ज पूरी तरह से माफ नहीं किया गया है। केवल 50 हजार रुपए का कर्ज माफ किया गया है, जबकि हमने कहा था कि 2 लाख तक का कर्ज माफ किया जाएगा। 2 लाख रुपए तक के कर्ज को माफ किया जाना चाहिए।”
जेपी ने अव्यवहारिक राजनीति की, वे ऐसी मसीहाई भूमिका में आ गए थे, जो अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई और अपने ही लोगों के खिलाफ लड़ाई को एक ही तराजू में तौल रहे थे। उन्हें उम्र के उस अंतिम पड़ाव में जरा भी भान नहीं हुआ कि जो लोग उनकी पालकी उठा रहे हैं, उनकी मंशा क्या है?