अशोक चव्हाण के नेतृत्व में राज्य का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। 2014 के लोकसभा चुनाव में राज्य में कॉन्ग्रेस में सिर्फ 2 सीटें मिली थी, तो वहीं, इस बार के चुनाव में महज 1 सीट से ही संतोष करना पड़ा। अशोक चव्हाण खुद अपनी सीट भी नहीं बचा पाए।
देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम काफी भावुक हो गए। उन्होंने राहुल गाँधी से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि वो अध्यक्ष पद न छोड़ें। अगर वो अध्यक्ष पद से इस्ताफा देंगे, तो दक्षिण भारत के कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता आत्महत्या कर लेंगे।
एक बार फिर कॉन्ग्रेस में वर्ष 2014 की ही तरह इस्तीफ़ा देने और अस्वीकार कर दिए जाने का शिष्टाचार निभाया गया है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा कॉन्ग्रेस कार्यकारिणी समिति को इस्तीफ़ा को इस्तीफ़ा सौंपा गया और कमेटी द्वारा इसे नामंजूर कर दिया गया है।
दिग्विजय सिंह को भोपाल सीट से विजयी बनाने के लिए महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद ने कुल 5 क्विंटल मिर्च डालकर एक विशाल हवन किया था और वहीं प्रतिज्ञा ली थी कि अगर कॉन्ग्रेस ये सीट हारती है, तो वह इसी हवनकुण्ड में समाधि ले लेंगे।
"यूपी कांग्रेस के लिए परिणाम निराशाजनक हैं। अपनी ज़िम्मेदारी को सफ़ल तरीके से नहीं निभा पाने के लिए ख़ुद को दोषी पाता हूँ। नेतृत्व से मिलकर अपनी बात रखूँगा।"
रामचंद्र गुहा ने कहा, "राहुल गाँधी ने अपना आत्मसम्मान, राजनीतिक कद दोनों ही गँवा दिया है। मैं माँग करता हूँ कि कॉन्ग्रेस को अब एक नए नेतृत्व की जरूरत है, लेकिन कॉन्ग्रेस के पास वो भी नहीं है।”
"तुमने जिस ख़ून को मक़्तल में दबाना चाहा, आज वह कूचा-ओ-बाज़ार में आ निकला है। कहीं शोला, कहीं नारा, कहीं पत्थर बनकर" शायर साहिर लुधियानवी ने ये पंक्तियाँ 23 मई 2019 की सुबह को ध्यान में रखकर नहीं लिखी थीं। ये पंक्तियाँ लिखी जा चुकी हैं, ठीक उसी तरह जिस तरह नरेंद्र मोदी को एक बार फिर देश ने सर आँखों पर बिठा लिया है।
एएनआई के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में शनिवार (मई 25, 2019) को कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक होगी। जिसमें पार्टी की हार की वजहों पर चर्चा करने करने के साथ ही कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर किसी बड़े फैसले की भी उम्मीद की जा रही है।
कॉन्ग्रेस को अब राहुल गाँधी के आगे सोचना होगा, एक नेता और देश के नेतृत्त्व के लिए वे स्वयं को सर्वोत्तम प्रत्याशी साबित नहीं कर पाए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि वे स्वयं भी प्रधानमंत्री बनना नहीं चाहते हैं और उन्हें पार्टी जबरदस्ती नेता बना कर रखना चाहती है।
मुख्यमंत्री कुमारस्वामी अपने पद से त्यागपत्र दे सकते हैं। कर्नाटक में सत्ताधारी दल के 17 विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं। तृणमूल के 47 विधायक पार्टी छोड़ने का मूड बना रहे हैं।