भोपाल में दिग्विजय सिंह ने कंप्यूटर बाबा की अगुवाई में पत्नी अमृता के साथ पूजा पाठ और हवन किया। कंप्यूटर बाबा ने दिग्वियज सिंह के समर्थन में हजारों की संख्या में साधु संत को लेकर भोपाल में कैंप लगाकर हठयोग शुरू कर दिया है।
संगरूर स्थित दिड़बा के चट्ठा ननहेड़ा गाँव में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी केवल सिंह ढिल्लों के पुत्र करण सिंह ढिल्लों प्रचार के लिए पहुँचे तो उन्हें ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। लोगों ने कॉन्ग्रेस पर गुटका साहिब की बेअदबी का आरोप लगाया।
एक पिता के तौर पर तो बच्चों को हमेशा परिवार के साथ खड़े रहना चाहिए, लेकिन वो पिता प्रधानमंत्री भी था, और दुर्भाग्य से चोर और हत्यारा भी। देश उनके पिता से बड़ा है और अगर ये दोनों देशभक्त हैं तो राहुल या प्रियंका को मोदी की बात सुन कर चुपचाप रोने के बाद, आँसू के घूँट पीकर, रैली में किसी और विषय पर भाषण देते रहना चाहिए था।
ये मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिस पर लोगों ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है। ट्विटर पर अपना ग़ुस्सा ज़ाहिर करते हुए एक यूज़र ने लिखा, "ये क्या हो रहा देश में। कुछ कानून नाम के कोई चीज है या नही। पूरी गुंडा गर्दी हो रही है।"
अपनी धुर विरोधी पार्टी बीजेपी के ख़िलाफ़ कोई मुद्दा ना मिलता देख केवल इसी ताक में रहना कि कब मोदी क्या कह दें और उसे एक मौक़ा समझकर ये सारे लपक लें, और फिर शुरू हो जाए अनरगल बातों का दौर।
मायावती ने महागठबंधन के समर्थकों से अपील की है कि वो लोग 6 मई को रायबरेली और अमेठी लोकसभा सीट पर होने वाले मतदान में कॉन्ग्रेस नेताओं के पक्ष में वोट करें।
दिल्ली में महिला सुरक्षा की स्थिति पर उनकी राय के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि जहाँ तक पुलिस के दखल की बात है, उसमें पूरा रोल केंद्र सरकार का रहता है क्योंकि दिल्ली सरकार एक पुलिसकर्मी की ड्यूटी तक नहीं लगा सकती है।
कॉन्ग्रेस ने ट्विटर पर पूरी बेशर्मी के साथ एक ऐसी रिपोर्ट ट्वीट की है, जिसमें 2014 में RBI का 200 टन सोना स्विट्जरलैंड भेजने की बात कही गई है। कॉन्ग्रेस ने नेशनल हेराल्ड की एक ‘खोजी रिपोर्ट’ को टैग करते हुए लिखा, “क्या मोदी सरकार ने गुपचुप तरीके से RBI का 200 टन सोना 2014 में स्विट्जरलैंड भेजा?”
2011-12 में, फ्लैश फोर्ज ने यूके आधारित कंपनी ऑप्टिकल आर्मर का अधिग्रहण किया और McKnight कंपनी के निदेशक के रूप में ऑप्टिकल आर्मर से जुड़ गया। 2012-13 में, McKnight को ऑप्टिकल आर्मर कंपनी के 4% शेयर आवंटित किए गए थे।
कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता इस फॉर्म को बाँटते वक्त लोगों को बकायदा ये भी बता रहे हैं कि किस सूची में कौन सी जानकारी भरनी है। इस फॉर्म में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों से महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ जैसे नाम, पिता का नाम, बैंक का नाम, बैंक खाता और आधार नंबर आदि भरवाया जा रहा है और इसके महत्त्व को बढ़ाने के लिए इस पर अँगूठे का निशान भी लिया जा रहा है।