जो मीडिया और क्रांतिजीव 5 साल तक मोदी की विदेश यात्राओं का लेखा-जोखा करते रहे, उन्हें नेहरू से लेकर राजीव गाँधी के भ्रमणों से रूबरू होना चाहिए, ताकि वो उसकी समीक्षा कर के बता सकें कि मिस्ट्रेसीकरण और ससुरालीकरण उनकी किसी विदेश नीति का हिस्सा थे?
आरोप है कि इन पैसों का इस्तेमाल वोटरों की खरीद-फरोख्त के लिए किया जाने वाला था। इस सिलसिले में आईपीसी की धारा 171 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।
निजी कारणों के लिए नौसेना की संपत्ति का उपयोग करने की परंपरा राजीव गाँधी द्वारा शुरू नहीं की गई थी। जवाहरलाल नेहरू ने इस पुश्तैनी परंपरा की शुरुआत की थी वो भी "आदमखोर" महिला मित्र एडविना माउंटबेटन के लिए।
अभी हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को थप्पड़ मारने की ख़बर सामने आई थी, इसी बीच कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह पर एक महिला द्वारा अपनी चप्पल (स्लीपर) मारने की ख़बर का ख़ुलासा हुआ है।
मेहमानों की सूची में राहुल और प्रियंका के चार दोस्त, सोनिया गाँधी की बहन, बहनोई और उनकी बेटी, उनकी विधवा माँ आर. मैनो, उनके भाई और एक मामा शामिल थे। साथ ही पूर्व सांसद अमिताभ बच्चन, उनकी पत्नी जया और उनके तीन बच्चे भी मौजूद थे।
ये चम्पक लेफ़्ट-लिबरल इको सिस्टम जितना चिल्ला ले कि मोदी ने तो कॉन्ग्रेस की योजनाओं का नाम बदल दिया, लेकिन सत्य यही है कि योजना का सिर्फ नाम ही नहीं बदला, उस पर काम भी किया, और करोड़ों ज़िंदगियों को उन छोटी सुविधाओं से छुआ, बेहतरी दी, जो साउथ और नॉर्थ ब्लॉक में बैठे लोगों के लिए नगण्य या इन्सिग्निफिकेंट थीं।
दिग्विजय सिंह की इस रैली में पूरा माहौल भगवा रंग में रंगा नजर आया। रैली में शामिल लोगों ने भगवा झंडा लिया हुआ था और गले में भगवा पट्टे भी ओढ़े हुए थे। इस दौरान मध्य प्रदेश पुलिस के जवान भी सादी वर्दी पहने गले में भगवा रंग का पटका डाले नजर आए।
चुनाव आयोग ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ प्राप्त शिकायतों में से अधिकांश में कहा कि वे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं करते हैं। ऐसी स्थिति में, सुष्मिता देव ने SC में मामले में एक अतिरिक्त हलफनामा दायर कर चुनाव आयोग के फैसलों को संशोधित करने की माँग की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस टिप्पणी के बाद कॉन्ग्रेस के साथ ही अन्य पार्टियों ने भी इसका कड़ा विरोध किया था। वहीं सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक होती रही। लोगों का कहना था कि किसी के मृत्यु से उसके अपराध नहीं ख़त्म हो जाते।