"मुसलमानों की भीड़ लाठी-डंडे, ईंट-पत्थर, सरिया, रॉड, तमंचे लेकर गली से मेन रोड की तरफ जा रही थी। भीड़ में महिलाएँ और बच्चे भी थे। हिंदुओं पर हमला करने के लिए वे अपने बच्चों और महिलाओं को घरों से बाहर निकाल रहे थे। इसे देखकर मैं दंग रह गई।"
विडियो में मस्जिद की तस्वीरें और उसपर इकट्ठा ईंट-पत्थर एकदम क्लियर हैं। लेकिन एनडीटीवी की एकतरफा पत्रकारिता की हद देखिए... लोगों को बरगलाने के लिए उसने मस्जिद को क्रॉप कर दिया ताकि इस्लामी आतताइयों की हकीकत छिपी रहे।
हिन्दू विरोधी दंगों के दौरान ताहिर का घर मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। वहॉं हिंदू घसीटकर लाए गए और उनकी निर्मम हत्या की गई। यूपी के अमरोहा से आया ताहिर कैसे बन गया दंगाइयों का सरगना?
"ये मैटर नहीं करता दुकान किसकी है... मैटर ये करता है कि नुकसान किसका हुआ हुआ आप पूछना चाहते हैं कि ये दुकान हिंदू की है या मुस्लिम की। मैं क्यों बताऊँ किसकी है। मैं तो कहूँगा कि नुकसान हमारा भी हुआ।"
"अंकित शर्मा और उनके साथ कुछ लोग ताहिर के मकान के पास पहुँचे ही थे कि दंगाइयों की भीड़ झपट पड़ी। हमें ताहिर के घर में खींचने की कोशिश की। मैंने अपना हाथ झटके से छुड़ा लिया और वहाँ से दौड़ पड़ा। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वह तीनों ग़ायब थे।"
अभी तक सिर्फ 25 शवों की पहचान हो पाई है। इनमें 10 हिंदू हैं। सबसे कम उम्र का मृतक अमन 17 साल का है, जबकि 70 साल के दो बुजुर्ग की भी हत्या हुई है। एक महिला को भी जान गंवानी पड़ी है।
जाफराबाद में हिंसा के दौरान शाहरुख ने आठ राउंड फायरिंग की थी। वह परिवार के साथ फरार बताया जा रहा है। उसकी तलाश में क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल की टीमें लगी हुई हैं।
अंकित शर्मा को 6 लोगों ने लगातार 2 से 4 घंटे तक 400 बार चाकुओं से गोदा होगा। साथ ही, उनकी आँत को शरीर से बाहर निकाल दिया था। फोरेंसिक डॉक्टरों ने कहा कि इस तरह से यातना का शिकार और क्षत-विक्षत बॉडी उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा।
दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह ख़ान ने कहा है कि बोर्ड नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के प्रभावित इलाक़ों में राशन वितरण करेगा। अभी तक पुलिस ने कुल 105 लोगों को विभिन्न मामलों में गिरफ़्तार किया है। उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने पूरी स्थिति की समीक्षा के लिए एक बैठक भी की।
जानकारी मिली कि इस्लामी भीड़ हिंदुओं के घरों को अपना निशाना बना रही है। हमने अपने-अपने चारों बच्चों को मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र से निकाला और दूसरी गली में एक परिचित के घर पहुँचा दिया। हम इतने डर गए कि सोमवार को पूरे दिन और पूरी रात भूखे प्यासे बच्चों के साथ घर में कैद रहे।