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दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों की सच्चाई और उसे छिपाने का प्रोपेगेंडा: 9 कार्टून से खुली पोल

ये 9 कार्टून्स सिर्फ कार्टून नहीं हैं। ये हकीकत है दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों की। उन दंगों की, जिनमें कई बेकसूर बड़ी बेरहमी से मारे गए। सच्चाई यह भी है कि इन्हें प्रोपेगेंडा के तहत छुपाया गया, अभी भी छिपाया जा रहा है। ये कार्टून इन सबका पर्दाफाश करती है।

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों से डर का ऐसा माहौल बना है कि नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के हिन्दू अभी भी दहशत में हैं। कइयों के घर जला दिए गए तो कइयों की जानें चली गईं। इस पूरे प्रकरण में मीडिया रोल एकदम संवेदनहीन रहा और उसने सच्चाई दिखाने से परहेज किया। ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने तो अपनी ख़बर में यहाँ तक दावा कर दिया कि आईबी अधिकारी अंकित शर्मा को ‘जय श्री राम’ चिल्लाती हुई भीड़ ने मारा है। जबकि अंकित के भाई अंकुर लगातार इस ख़बर को नकार रहे हैं क्योंकि ताहिर हुसैन के गुंडों ने प्रताड़ित कर के अंकित को मार डाला।

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इधर दंगों की सच्चाई और मीडिया के पक्षतापूर्ण रवैये को दिखाते हुए एक कार्टूनिस्ट ने काफी बढ़िया टून्स बनाए हैं, जो आपको वास्तविकता से रूबरू कराते हैं। नीचे हम उनके कुछ कार्टून्स संलग्न कर रहे हैं, जो इन दंगों की वास्तविकता को बयान करते हैं। नीचे इस तस्वीर में आप कार्टूनिस्ट अमोल की उन 9 कार्टून्स को देख सकते हैं, जो मुस्लिम भीड़ के इस तांडव की पोल खोलते हैं:

दंगों की साफ-सफाई करती झाड़ू!
पहले दंगा, फिर प्रोपेगेंडा
सामने से गोली और पीछे से राजनीति
पुलिसवाले की हत्या लेकिन करने वाले शांति के दूत!
नाले से निकलती लाश और संविधान की रक्षा!
माथे में स्क्रू ड्राइवर और सेक्यूलरिजम से लेकर भाईचारे जैसे शब्दों का गढ़ा जाना
स्क्रू ड्राइवर से टपकता खून और बचता संविधान!
सेल्फ डिफेंस के नाम पर हत्या के पीछे का प्रोपेगेंडा
जहर घोलते नेताओं पर चोट करता कार्टून

आप अमोल के इंस्टाग्राम अकाउंट (instagram.com/PR1CELES5/) पर भी जाकर उन्हें फॉलो कर सकते हैं, जहाँ वो कार्टून्स के माध्यम से लगातार वामपंथियों के प्रोपेगेंडा की पोल खोलते रहते हैं। इससे पहले भी हमने आपको कार्टूनिस्ट ‘टीपुडा’ के बारे में बताया था। तब वो एक ‘बड़े’ कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य के पक्षपाती कार्टून्स को ट्विटर (twitter.com/PR1CELES5) पर सही रूप देकर चर्चा में आए थे।

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टीपूडा का ही असली नाम अमोल है। वो प्रोफेशनल कार्टूनिस्ट नहीं है, लेकिन कार्टून के माध्यम से चीजों का खंडन करने के लिए वो काफी पॉपुलर है। अमोल ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा था कि उन्होंने ये सब कार्टून मजे के लिए बनाए थे, लेकिन साथ ही वो एक मैसेज भी देना चाहते थे। उन्होंने कहा कि समय मिलने पर वो और भी कार्टून बनाएँगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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