"मुझे पूरा भरोसा है कि आने वाले समय में केंद्र इस पर (आर्थिक मंदी पर) ठोस कदम उठाएगा। जो भी कदम केंद्र उठाएगा, दिल्ली सरकार का उन्हें पूरा समर्थन मिलेगा। मैं नौकरियों के खोने को लेकर व्यक्तिगत रूप से चिंतित हूँ।"
आँकड़ों के अनुसार, साल 2019 के अप्रैल-जून के दौरान चीन की जीडीपी वृद्धि दर 6.2% रही, जबकि पहली तिमाही में यह 6.4% थी। इससे कम वृद्धि दर 1992 की जनवरी-मार्च तिमाही में दर्ज की गई थी।हालाँकि, जीडीपी के यह आँकड़े पूरे साल के लिए सरकार के छह से 6.5% के लक्ष्य के अनुरूप हैं।
आरबीआई की रिपोर्ट 'बेंचमार्किंग इंडियाज पेमेंट सिस्टम्स' में कहा गया है कि पिछले 4 साल में भारत में खुदरा इलेक्ट्रॉनिक भुगतान में 50% से ज्यादा का इजाफा हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) में जबरदस्त बढ़ोतरी के कारण मुख्य रूप से 2018-19 में इसमें इजाफा हुआ है।
सिर्फ दो सेक्टर ने इतने लोगों को नौकरियाँ दी हैं, जबकि मुद्रा लोन, इन्फ़्रास्ट्रक्चर सेक्टर से लाखों लोगों को काम देने की बात या स्वरोज़गार करते लोगों की संख्या आदि का कोई आधिकारिक या सरकारी आँकड़ा न होने के कारण ये कहना आसान हो जाता है कि ये ग्रोथ 'जॉबलेस' या रोज़गारहीन है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि कक्षा बारह तक के विद्यालय ज्ञान के उत्पादक नहीं होते जबकि विश्वविद्यालय और उच्च शोध संस्थान मौलिक ज्ञान के उत्पादन हेतु ही बने हैं। भारत की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को पुष्ट करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक ऐसे अनेक प्रयास किये हैं जिन्हें परिवर्तित होते भारत अथवा ‘न्यू इंडिया’ की आधारशिला के रूप में देखा जा सकता है।