आँकड़े बताते है कि वर्ष 2008-2015 तक दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का परीक्षा परिणाम कभी भी 85% से कम नही हुआ। लेकिन राजनीतिक लाभ और मीडिया मैनेजमेंट के लिए बच्चों को आक्रामक रूप से 9वीं और 11वीं में रोक दिया जाना कितना उचित है?
ऑपइंडिया ने संजीव कुमार की वर्तमान स्थिति जानने के लिए डुमरा थाना क्षेत्र के SHO को संपर्क किया। SHO ने हमें बताया कि संजीव की स्थिति फिलहाल स्थिर है। लेकिन उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं मिला है।
"यह पुस्तक शिक्षा विभाग द्वारा निर्दिष्ट पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा नहीं है। स्कूल ने स्वयं यह किताब शामिल की है। छात्रों के मन में पूर्वाग्रह स्थापित करने वाले किसी भी कृत्य को हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।"