हैदराबाद इनकाउंटर को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक पुलिस का आभार व्यक्त किया जा रहा है। घटनास्थल पर पहुँचे हजारों लोगों ने पुलिस पर फूल बरसाए हैं और महिलाओं ने पुलिस की कार्रवाई पर अपनी खुशी प्रकट करते हुए उन्हें राखी बाँधी है। एसीपी और डीसीपी जिंदाबाद के नारे भी...
साल 2008, दो लड़कियाँ इंजिनियरिंग की पढ़ाई करती थीं - स्वपनिका और प्रनिथा। स्वपनिका को श्रीनिवास ने प्रोपोज किया। स्वपनिका ने ठुकरा दिया। लेकिन 'मर्द' श्रीनिवास ने इसे अपना अपमान समझा। अपने 2 दोस्तों के साथ मिलकर उसने स्वपनिका के साथ-साथ प्रनिथा पर भी एसिड फेंक दिया।
कानून मंत्री रेड्डी ने कहा कि आरोपितों को भगवान ने उनके किए की सजा दी है। जिससे हैदराबाद समेत पूरे देश में खुशी है। उन्होंने दावा भी किया कि वह चारों पुलिस के हथियार लेकर भागने की कोशिश कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन पर फायरिंग की।
इससे पहले पीड़िता के पिताजी ने मंगलवार को कहा था, "दोषियों को जितना जल्दी संभव हो उतनी जल्दी सजा मिलनी चाहिए। कई कानून बनाए गए लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा है। निर्भया केस को ही देख लीजिए। दोषियों को फाँसी पर लटकाना चाहिए।"
क्राइम सीन को रिक्रिएट करने के लिहाज से पुलिस चारों आरोपित दरिंदों को उसी हाइवे के पास लेकर पहुँची थी, जहाँ यह जघन्य अपराध किया गया था। लेकिन वहाँ से ये सभी भागने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों को मार गिराया।
राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करने वालों में हैदराबाद के लोकसभा सांसद प्रमुख हैं। उन्होंने फैसले पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा था कि खैरात में पाँच एकड़ जमीन नहीं चाहिए।
“आखिरी बार जब उसने मुझसे बात की थी, तो वो रास्ते में थी। उसने मुझसे फल काटकर रखने के लिए कहा था। उसने कहा था कि उसे बहुत भूख लगी है। लेकिन... मैं चाहती हूँ कि वे उसी तरह से जले, जैसे उसने मेरी बेटी को जलाया।”
"अगर आपके आस-पास कोई व्यक्ति है तो फोन पर अपने किसी सम्बन्धी से बात करने का नाटक करें। ऐसा दिखाएँ कि वो सम्बन्धी कोई पुलिसवाला है और उससे बातचीत का ड्रामा करते हुए अपनी लोकेशन शेयर करें। इससे आप पर ग़लत नज़र रखने वाले डर जाएँगे।"
घटना के 4 दिन बाद मुख्यमंत्री केसीआर ने अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा कि वो इस ख़बर से व्यथित हैं। मुख्यमंत्री ने फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के बाद दोषियों को जल्द से जल्द सज़ा दिलाए जाने की बात कही है। लोग पुलिस व प्रशासन से नाराज़ हैं।