जाँच में विदेशी फंडिंग का एंगल भी सामने आया है। एटीएस के अनुसार 2 करोड़ रुपए यूनाइटेड किंगडम से आए जिनका उपयोग मुख्य आरोपित उमर गौतम और मुफ्ती कासिम के द्वारा किया गया।
हेरमैन ने बताया कि हमले के पीछे 'इस्लामी कट्टरपंथ’ से इंकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोपित को 'अल्लाह हू अकबर' चिल्लाते हुए सुना।
महमूद ने यहाँ तक कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार जनसंख्या नियंत्रण की आड़ में मुस्लिमों पर हमला कर रही है तथा जनसंख्या नियंत्रण कानून को मुस्लिमों को ध्यान में रखकर ही लाया जा रहा है।
“यह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अपने भाईचारे को कायम रखने के लिए इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़े कि लगातार बेटियाँ अगवा हो रही हैं, लगातार उनका जबरन निकाह हो रहा है, धर्म परिवर्तन हो रहा है।"
उमर गौतम द्वारा स्थापित इस्लामिक दावा सेंटर में ही गैर मुस्लिमों का धर्मान्तरण कराया जाता था। मोहम्मद उमर अपने चार मंजिला घर को ही ऑफिस बना रखा था, जिसे एटीएस ने सील कर दिया है।
तमिलनाडु के राजनीतिक दल 'इंदु मक्कल काची' ने ट्विटर पर इस एप के बारे में शेयर करते हुए लिखा था कि गूगल अब भारत के खिलाफ जिहाद को बढ़ावा देने में भी लग गया है।