हम मोदी सरकार के पिछले 6 वर्षों को याद करें तो इस दौरान कई ऐसी परिस्थितियाँ सामने आई, जिसे फर्जी तरीके से गढ़ा गया था। चाहे वो राफेल रोना होना हो या जज लोया की मौत और उसके साथ लगाए गए झूठे इल्जाम। इतना ही नहीं....
हर राष्ट्र में कानून बहुसंख्यकों के हिसाब से होता है और अल्पसंख्यकों को उसी दायरे के अनुकूल बनना पड़ता है। यहाँ हमेशा उल्टा होता आया है क्योंकि सर्वसमावेशन और सहिष्णुता की बात सिर्फ हिन्दुओं की ही जिम्मेदारी बन गई है।
इस वीडियो में मौजूद लोगों को ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा लगाते हुए भी सुना जा सकता है। इसी बीच एक व्यक्ति मीडिया वालों से बात करते हुए मोदी सरकार पर आपत्तिजनक टिप्पणी करता है और कहता है कि हम रास्ते जाम कर सकते हैं।
ईडी की टीम उत्तर प्रदेश पीएफ़आई अध्यक्ष, नसीम अहमद के इंदिरानगर लखनऊ स्थित आवास पर छापा मारा और बाराबंकी में पीएफ़आई के सदस्य मुदस्सिर के आवास पर भी छापा मारा।
26/11 हमलों की बरसी के मौके पर मेंगलुरु की दीवारों पर भयावह बातें लिखी (ग्राफिटी) हुई थीं। जिसमें चेतावनी दी गई थी कि ‘संघी और मनुवादियों’ को ख़त्म करने के लिए लश्कर-ए-तैय्यबा और तालिबान की मदद ली जा सकती है।