राष्ट्र के नाम सम्बोधन में पीएम मोदी ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख के विकास के लिए कंपनियों से आगे आने की अपील की थी। अम्बानी ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में उद्योग स्थापित करने और रोजगार को बढ़ावा देने का जो स्वप्न देखा है, रिलायंस परिवार उसे पूरा करने को प्रतिबद्ध है।
शोभा डे ने अपने लेख में कहा था कि बुरहान वानी को भले ही 'अल्ट्रा-पेट्रियट' आतंकी कहें या गद्दार, कश्मीर के लोगों का वो हीरो था, उसमें 'करिज़्मा' था। हिंदुस्तान के नेताओं को घेरते हुए उन्होंने लिखा था कि वे अपने घरों में आराम से बैठकर 'शांतिप्रिय' कश्मीरियों के बारे में खोखले भाषण देते हैं।
दिग्विजय सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का हवाला देते हुए कहा कि सरकार देखे कि कश्मीर में क्या हो रहा है। कश्मीर हमारे हाथ से निकल जाएगा। जबकि प्रशासन अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की ख़बरों को मनगढंत बताकर पहले ही ख़ारिज कर चुका है।
महबूबा के साथ विवाद के दौरान उमर उन पर चिल्ला पड़े। उन्होंने महबूबा के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद पर भाजपा के साथ 2015 में गठबंधन करने का आरोप मढ़ा। महबूबा ने भी उमर को याद दिलाया कि किस तरह से उनके पिता फारूक अब्दुल्ला ने भाजपा का साथ दिया था।
प्रशासन के मुताबिक आवश्यक वस्तुओं का राज्य में पर्याप्त स्टॉक है। 65 दिनों का गेहूॅं, 55 दिनों का चावल, 17 दिनों का मटन, एक महीने का चिकन, 35 दिनों का मिट्टी का तेल, एक महीने का गैस सिलेंडर और 28 दिनों के पेट्रोल का राज्य में स्टॉक है।
पहले वर्ग के अनुसार यह वह भूमि है जहाँ मानव समाज की स्थापना हिंदू ऋषि कश्यप ने की। दूसरे वर्ग के अनुसार इस स्थान का नाम कैशमीर उचित है, क्योंकि यह 1947 के बाद से पाकिस्तान को विश्व भर से और भारत के वर्ग विशेष को पाकिस्तान से कैश उपलब्ध कराता रहा है।
"संघर्ष विराम का ऐलान करने की वजह से कश्मीर का एक-तिहाई हिस्सा पाक के कब्जे में रह गया। भला एक देश में कैसे दो निशान, दो विधान और दो प्रधान अस्तित्व में हो सकते हैं? यह केवल देश के साथ अन्याय नहीं बल्कि अपराध भी है।”
कश्मीर के आईजी एसपी पाणि ने भी पुलिस फायरिंग की ख़बरों को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, "कुछ इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस फायरिंग का दावा किया गया है, जो पूरी तरह गलत है। ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। पिछले एक हफ्ते से घाटी में शांति है।"
गिरफ्तार किया गया मौलाना खैम रिज्वी तहरीक-लब्बैक नाम के संगठन से जुड़ा है। किले की देखरेख करने वाली अर्ध सरकारी संगठन वर्ल्ड सिटी ऑफ लाहौर अथॉरिटी ने बकरीद के बाद प्रतिमा ठीक कराने की बात कही है।
आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी किए जाने के बाद से पाकिस्तान को कुछ सूझ ही नहीं रहा है। वह ऐसे फैसले ले रहा है, जो आत्मघाती साबित हो रहे हैं। सिर्फ सामरिक ही नहीं, आर्थिक मोर्चे पर लिए फैसले भी पाकिस्तान को नुकसान पहुँचा रहे हैं।