वीडियो में तनवीर फ़ातिमा ने हुर्रियत नेता सैय्यद अली शाह गिलानी, अलगाववादी नेता यासिन मलिक और मीर वाइज़ का नाम लेते हुए कहा है कि ये लोग बच्चों को गुमराह करते हैं। उन्हें आज़ादी के सपने दिखा पत्थरबाज़ी की राह पर ले जाते हैं।
हिन्दू संगठनों ने कहा, "जो परिवार अपनी जन्मभूमि वापस नहीं जाना चाहते, उनकी संपत्ति का सरकार इस्तेमाल करे और ऐसे सभी परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। यह सब सरकार का दायित्व है।"
जब भारत सरकार का रुख साफ़ है कि पूरा का पूरा जम्मू कश्मीर देश का अभिन्न अंग है और यह हमारा आंतरिक मुद्दा है, ऐसे में इन प्रोपेगेंडा पोर्टल्स द्वारा पाकिस्तानी अजेंडे को आगे बढ़ाना कहाँ तक उचित है?
ऑपइंडिया तीखी-मिर्ची सेल की ख़ुफ़िया रिपोर्ट्स की मानें तो इन आतंकियों को उत्तर प्रदेश पुलिस की निगरानी में मात्र 'ठाँय-ठाँय' के ही स्वर से जन्नत-ए-फ़िरदौस की पहली यात्रा ट्रायल के तौर पर करवाई जाएगी।
खूँखार आतंकियों और पाकिस्तान समर्थित अलगाववादियों की घाटी में 'क्षमता' देखते हुए उन्हें आगरा के जेल में शिफ्ट किया गया है। इस खबर के बाद लोग सोशल मीडिया पर योगी आदित्यनाथ के मीम शेयर करने लगे।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल सुरक्षा हालात की समीक्षा के लिए खुद घाटी में हैं। उनका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें वे कश्मीरियों के साथ खाना खाते और बतियाते नजर आ रहे हैं।
अमेरिकी नेताओं ने कहा है, "पारदर्शिता और राजनीतिक भागीदारी लोकतंत्र का स्तंभ है और हमें उम्मीद है कि भारत सरकार इन सिद्धांतों का पालन करेगी। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के पास मौक़ा है कि वह दिखाए कि उसके लिए सभी नागरिक महत्वपूर्ण हैं। "
25 वर्षीय असलम ने बताया कि कुछ स्थानीय लोगों ने उनसे मारपीट की और उनका बैग लेकर कहा, "भागो बिहारी इधर से।" एक दूसरे प्रवासी को ऐसे धमकी दी गई - "अगर तुम मुझे कल दिखे तो मैं तुम्हें मारूँगा और केरोसीन से जला दूँगा।"
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद इन नेताओं की गिरफ्तारियाँ हुईं हैं। सुरक्षा के लिहाज से यहाँ इंटरनेट कनेक्शन और मोबाइल सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। साथ ही धारा 144 भी लागू है।
याचिका में कहा गया है कि आर्टिकल 370 को हटाने के लिए सरकार ने आर्टिकल 367 में जो संशोधन किया है, वह असंवैधानिक है। सरकार ने मनमाने और असंवैधानिक ढंग से ये बदलाव किया। इसलिए सुप्रीम कोर्ट से अपील है कि इस अधिसूचना को असंवैधानिक घोषित कर रद्द किया जाए।