कश्मीर भारतीय लोकतंत्र का आंतरिक मुद्दा है और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अपने बयानों को शांत करने की जरुरत है एवं उन्हें भारत से युद्ध और संघर्ष को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।"
हर मोर्चे पर मुँह की खाने के बाद अब पाकिस्तान ने मैदान में उतारा है बूढ़े हो चुके पूर्व क्रिकेटरों को, जो लोगों को सोशल मीडिया पर बरगला रहे हैं। इनमें से एक हैं शाहिद अफरीदी और दूसरे हैं दाऊद इब्राहिम के समधी जावेद मियाँदाद।
"पहले हम भारत को धमकी देते थे कि हम उससे कश्मीर छीन लेंगे, लेकिन इस नाकाम सरकार के चलते अब हालात ये हो गए हैं कि हमें मुजफ्फराबाद बचाने के लाले पड़ गए हैं।"
लोगों को लाल चौक और सोनावर जाने से रोकने के लिए शहर में कई जगह अवरोधक और कंटीले तार लगाए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र का कार्यालय इसी इलाके में है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जगह-जगह सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
ट्विटर पर एक यूजर अहमद वकास गोराया ने बताया है कि इस पूरी घटना की वीडियो एक पत्रकार ने अपने कैमरे में कैद किया था। लेकिन पाक मंत्री के दोस्त ने उसका फोन छीन वीडियो डिलीट कर दी।
शाजिया इल्मी को भारत विरोधी नारों से आपत्ति हुई तो वह प्रदर्शनकारियों के बीच पहुँच गईं और उन्हें समझाने की कोशिश की। जब प्रदर्शनकारी नहीं माने, तो वे भी इंडिया जिंदाबाद के नारे लगाने लगीं।
क्या लद्दाख के बौद्ध लोगों का डर नाजायज है कि जब कश्मीरी आतंकी वहाँ लहसुन-ए-हिन्द चिल्लाकर नारा-ए-अदरक लगाते आएँगे तो उन्हें वहाँ से भाग कर कहीं और नहीं जाना पड़ेगा?
सत्य पाल मलिक ने आरोप लगाया कि अपने साथ प्रतिनिधिमंडल लाकर राहुल गाँधी मामले का राजनीतिकरण कर रहे हैं। यही नहीं, उन्होंने इससे घाटी में उपद्रव फैलने और आम लोगों के लिए दिक्कतें खड़ी होने की आशंका भी जताई।
"ये सरकार नगा अलगाववादियों से बात कर रही है, जिन्होंने सरेंडर नहीं किया है। जब एक बड़े नगा नेता का निधन हुआ, तो तिरंगे के साथ वहाँ उनका अपना झंडा था, सरकार के लोग वहाँ गए, क्या तब उन्हें 2 झंडे याद नहीं आई?"