सआदत छात्रावास के नाबालिग लड़कों ने ख़ुद दावा किया कि उनके गुदा से ख़ून बहने की ख़बरें झूठी हैं। सीतापुर के रहने वाले 21 साल के इरफ़ान हैदर ने बताया कि 'कुछ मदरसा छात्रों को पुलिस यातना का दंश झेलना पड़ा' जैसी सारी ख़बरें झूठी थीं, इनका कोई आधार नहीं था।
IIT, फैज, CAA, मोदी-शाह विरोध... मतलब गिरोह विशेष के लिए फेक न्यूज फैलाने का भरपूर मसाला। ऐसे में सिर्फ BBC ही इसमें क्यों आगे रहे! मीडिया के तमाम बड़े नामों ने 'फैज की नज्म हिंदू विरोधी' के टाइटल से खबर चलाई। किसी ने भी सच जानने की कोशिश नहीं की।
NDTV ने ट्वीट के पूरे अर्थ को ही अपने मन-मुताबिक बदल दिया। जहाँ All the rioters are shocked (to see police action) होना चाहिए, वहाँ लिखा - 'SHOCKED EVERY PROTESTER' जिसका मतलब है कि ‘हर प्रदर्शनकारी को (पुलिस ने/सरकार ने) हैरान कर दिया।
"...कमल के निशान पर जो वोट दबाओगे ना, वो नरेंद्र मोदी को मिलने वाला है... ये समझकर दबाना... मुझे 'हाँ हाँ' कर रहे हो, ये 20-25 हजार लोगों से जीत जाएँगे क्या? जीतेंगे क्या?... अरे भाई, क्या 'हाँ' कह रहे हो? मैं भी बनिया हूँ... मुझे मालूम है नहीं जीतेंगे यार..."
ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब NDTV के एंकर्स ने झूठ फैलाने में दिलचस्पी दिखाई हो। इससे पहले 2018 में NDTV ने अपने सोशल चैनल्स पर ‘असम बीजेपी सांसद के भतीजे, नागरिक सूची में नहीं हैं, ऐसा भी होता है’ हेडिंग के साथ एक न्यूज़ अपलोड और शेयर की थी।
NDTV की एंकर सोनल मेहरोत्रा कपूर ने असम में सरकारी नौकरियों के लिए दो-बच्चे से संबंधित खबर को पढ़ते हुए दावा किया कि दो से अधिक बच्चे वाले लोग असम में सरकारी नौकरी पाने के पात्र नहीं होंगे, जबकि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के ख़ुद 6 बच्चे हैं।
चेन्नई रेलवे डिवीजन के अधिकारियों ने चूहे पकड़ने पर औसत खर्च को लेकर कहा कि इस तरह चूहा मारने पर खर्च का औसत निकालना गलत और अनुचित है। ये गिनती तो मरे हुए उन चूहों की है जिन्हें पकड़ा गया। जो दवा के असर से कहीं और जाकर मरे उनका हिसाब नहीं है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि एक चूहे को पकड़ने पर 22 हजार रुपए खर्च हुए।
"ये एक पुरानी तस्वीर है। और एक कवि की कुछ पंक्तियों का यहाँ इस्तेमाल प्रोपगेंडा फैलाने के लिहाज से हुआ है। तस्वीर में दिख रहे अधिकारी उन नाबालिग बच्चों की कॉउंसलिंग कर रहे हैं, जो साल 2010 में पत्थरबाजी में शामिल थे।"
जब से इसकी शुरुआत हुई थी, तभी से हिन्दू-विरोधी प्रोपेगंडा के सबसे मुखर स्वरों में इसकी गिनती होने लगी थी। जिस भी अपराध में आरोपित हिन्दू हो और पीड़ित गैर-हिन्दू, वह अपने-आप 'Hate Crime' हो जाता था लेकिन इसी के उलट वाले मामलों में लीपापोती करते थे।
"सऊदी के एक व्यक्ति ने एयरक्राफ्ट के मॉडल की जगह गलती से असली एयरक्राफ्ट्स ख़रीद ली। 329 मिलियन यूरो ख़र्च कर उसने ऐसा किया और बाद में कहा कि इतना मूल्य उचित है। अर्थात, उसने 2600 करोड़ से भी अधिक रुपए ख़र्च कर दिए।"