विषय

modi

मामा नेहरू वाली नयनतारा की नई लिबरपंथी: अपना मामा लोकतान्त्रिक, मोदी हुए अवैध

नयनतारा सहगल जैसे लोग केवल व्यक्ति नहीं हैं, प्रतीक हैं- उस मानव-प्रवृत्ति का, उस ध्यानाकर्षण की लिप्सा और लोलुपता का, जिसके चलते इंसान अपने बूढ़े हो जाने, और अपने विचारों का समय निकल जाने के चलते हाशिए पर पहुँच जाने, अप्रासंगिक हो जाने को स्वीकार नहीं कर पाता।

क्या भाजपा को कॉन्ग्रेस की राजनैतिक निर्ममता अब दिखानी चाहिए?

EVM हैक हुई है, लेकिन उसे जनता ने हैक किया। आप जनता को विकास दिखा कर हैक कर लो, किसने रोका है?

प्रियंका ने लिया यू-टर्न, पर राहुल ने फिर कहा, ‘हाँ, हैं हम वोट-कटवा’

राहुल गाँधी ने देश को ‘आश्वस्त’ किया कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में महज भाजपा के वोट काटकर महागठबंधन को जिताने के लिए प्रत्याशी उतार रही है।

राहुल गाँधी झोंपड़ी में खाना खाकर भूल गए, मोदी ने दिलाया पक्का मकान

राहुल के भुंअन बाई के घर खाना खाने से पहचान तो मिली लेकिन जीवन की किसी समस्या का समाधान नहीं। टपरियन आज भी स्कूल, पेयजल की कमी, बेरोजगारी से दो-चार है।

मिलिए मोदी-अक्षय से तारीफ़ पाने वाले फोटोशॉप आर्टिस्ट कृष्णा से जिनकी कलाकारी आपका मन मोह लेगी

कृष्णा फोटोशॉप पर लोगों से हमेशा मसखरी करते हैं- खासकर नेताओं को तो वह बिलकुल नहीं बख्शते। यहाँ तक कि मोदी-शाह भी उनके फोटोशॉप के हमले से ‘महफूज’ नहीं रह पाए।

पत्रकारिता के (अ)नैतिक प्रतिमान सिद्धार्थ वरदराजन से और उम्मीद भी क्या है

हर खबर में इन्हें ‘एंगल’ ही यह दिखता है कि कैसे मोदी को गरियाने मिल जाए। यही इनका पत्रकारिता का (अ)धर्म है, यही इनकी (अ)नैतिक जिम्मेदारी है।

मोदी का चेहरा अच्‍छा नहीं था, इसलिए पत्‍नी ने छोड़ा: कॉन्ग्रेस MLA जमीर अहमद खान

जमीर अहमद खान ने कहा ने मोदी का चेहरा अच्छा नहीं था, इसीलिए पत्नी ने त्याग दिया। ऐसे चेहरे पर वोट देना चाहिए क्या लोगों को?

सागरिका जी, बता तो देतीं कि भारत में ‘अफ़्रीकी तानाशाह’ कौन है?

आपके आका सचमुच में इस सरकार की सही वाली कुछ खामियों की बात कर लेते तो मोदी को हराने के लिए ही आपको अफ्रीका से निंदा भी ‘इम्पोर्टेड’ न इस्तेमाल करनी पड़ती।

एक बेकार, नकारा विपक्ष लोकतंत्र को बर्बाद करने की क्षमता रखता है

राजनैतिक मजबूरियों का कवच पहनकर किसी के पाप नहीं धुलते। अगर किसी प्रधानमंत्री के शासनकाल में घोटाले हुए, समझौतों में देश की सुरक्षा को नकारा गया, तो वो प्रधानमंत्री साक्षात दशरथपुत्र रामचंद्र ही क्यों न हों, पाप के भागीदार वो भी हैं।

सेना का राजनीतिकरण मोदी कर रहा है या विपक्ष? इस वैचारिक जंग में पुराने क़ायदों को तोड़ना ज़रूरी है

रैलियों में यह बोला जाएगा, बार-बार बोला जाएगा क्योंकि हाँ, भारत के नागरिकों को पहली बार महसूस हो रहा है कि पाकिस्तान या बाहरी आतंकी मनमर्ज़ी से हमला कर के भाग नहीं सकते। यह सरकार उनकी सीमाओं को लाँघ कर निपटाएगी, बार-बार।

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें