दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी छापेमारी की निंदा करते हुए ट्वीट किया, “मैं जाने-माने वरिष्ठ वकीलों इंदिरा जयसिंह तथा आनंद ग्रोवर के घर पर CBI छापों की कड़ी निंदा करता हूँ… कानून को अपना काम करते रहना चाहिए, लेकिन जो दिग्गज सारी ज़िन्दगी कानून के शासन और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए संघर्ष करते रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई साफ़-साफ़ बदले की कार्रवाई है…।”
इसमें कहा गया है कि सभी मंत्रालयों व विभागों से आग्रह है कि वे सार्वजिनिक उपक्रमों/बैंकों और स्वायत्त संस्थानों समेत अपने प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाले विभागों के कर्मचारियों के कामकाज की ‘कायदे कानून और सही भावना’ के अनुसार समीक्षा करें।
नयनतारा सहगल जैसे लोग केवल व्यक्ति नहीं हैं, प्रतीक हैं- उस मानव-प्रवृत्ति का, उस ध्यानाकर्षण की लिप्सा और लोलुपता का, जिसके चलते इंसान अपने बूढ़े हो जाने, और अपने विचारों का समय निकल जाने के चलते हाशिए पर पहुँच जाने, अप्रासंगिक हो जाने को स्वीकार नहीं कर पाता।
राहुल के भुंअन बाई के घर खाना खाने से पहचान तो मिली लेकिन जीवन की किसी समस्या का समाधान नहीं। टपरियन आज भी स्कूल, पेयजल की कमी, बेरोजगारी से दो-चार है।
कृष्णा फोटोशॉप पर लोगों से हमेशा मसखरी करते हैं- खासकर नेताओं को तो वह बिलकुल नहीं बख्शते। यहाँ तक कि मोदी-शाह भी उनके फोटोशॉप के हमले से ‘महफूज’ नहीं रह पाए।
आपके आका सचमुच में इस सरकार की सही वाली कुछ खामियों की बात कर लेते तो मोदी को हराने के लिए ही आपको अफ्रीका से निंदा भी ‘इम्पोर्टेड’ न इस्तेमाल करनी पड़ती।