अलगाववादियों के लश्कर और हिज्बुल जैसे आतंकी संगठनों के साथ सम्बन्ध सामने आए हैं। ईडी को पता चला है कि अलगाववादियों, आतंकियों व कश्मीरी नेताओं के पास पाकिस्तानी उच्चायोग से भी सीधे फंड पहुँचाया गया।
NIA की टीम ने उत्तरी कश्मीर के बारामूला ज़िले में चार व्यापारियों के घर छापा मारा। इनमें अलगाववादी नेता सज्जाद लोन के क़रीबी व्यापारी आसिफ़ लोन, तनवीर अहमद, तारिक अहमद और बिलाल भट शामिल हैं।
इस्लामिक संगठन ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) आतंकवाद विरोधी अभियानों के नाम पर समुदाय विशेष के घरों में छापेमारी करके उनकी छवि को धूमिल कर रही है।
NIA का दावा है कि भट के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से बेहद करीबी संबंध थे और उसने अपने अखबार में लिखने के लिए कई जिहादी पत्रकारों को भी नौकरी पर रखा हुआ है। उनमें से कुछ पत्रकार अब कथित रुप से कश्मीर के प्रेस क्लब के कार्यकारी सदस्य हैं।
NIA के मुताबिक, उन्होंने मस्जिद का निर्माण, मज़हबी शिक्षा के लिए मदरसा और मजहब की गरीब लड़कियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने जैसे इस्लामी काम की आड़ में अपनी साजिश में अंजाम देने की साजिश रची थी।
एनआईए ने हसन अली और हरीश मोहम्मद को गिरफ्तार किया था। दोनों ने पूरे नेटवर्क का खुलासा करते हुए बताया था कि आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए उन्होंने पैसे की व्यवस्था और अन्य तैयारियाँ की थी।
एनआईए ने शनिवार को हसन अली और हरीश मोहम्मद नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया था। दोनों ने पूरे नेटवर्क का खुलासा किया और बताया कि इस्लामिक शासन स्थापित करने के मकसद से वे आतंकी हमले को अंजाम देना चाहता था। इसके लिए पैसे की व्यवस्था की और अन्य तैयारी की।
आसिया अंद्राबी के इस घर का इस्तेमाल आतंकी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की गतिविधियों के लिए किया गया। अब आसिया अंद्राबी अपने इस घर को तब तक नहीं बेच सकती है, जब तक इस पूरे मामले की जाँच खत्म न हो जाए।
शिकंजा कसने पर जेएमबी ने कुछ समय के लिए अपनी गतिविधियाँ बंद कर दी थी। लेकिन सलाउद्दीन अहमद और जहीदुल इस्लाम की अगुवाई में वह दोबारा पैर पसारने लगा है और अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने की फिराक में है। हाल ही में भारत सरकार ने जेएमबी को प्रतिबंधित किया है।
इस मामले में गढ़चिरौली पुलिस ने टॉप नक्सली कमांडर नर्मदक्का और उसके पति किरण कुमार को गिरफ़्तार किया था। उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए इनपुट और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दिलीप हिदामी, परसाराम तुलवी, सोमनाथ मडावी, किसान हिडामी और सुक्रु गोटा को भी गिरफ़्तार किया।