रायबरेली से कॉन्ग्रेस विधायक अदिति सिंह ने पार्टी के सभी Whatsapp ग्रुपों को छोड़ दिया है। पिछले दिनों उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से पार्टी का नाम हटाया था।
जयपुर के दो रिसॉर्ट में कॉन्ग्रेस ने मध्य प्रदेश के अपने विधायकों को रखा है। रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का यह 14वॉं मौका है। अब तक नौ राज्यों की सियासी उठापठक की वजह से यह देखने को मिला है। इस सिलसिले की शुरुआत 1982 में कॉन्ग्रेस के ही भय से हुई थी।
मुसलमानों का मसीहा बनने की कोशिश में महातिर पिछले कुछ समय से भारत के खिलाफ जमकर जहर उगल रहे थे। संयुक्त राष्ट्र महासभा में जम्मू-कश्मीर पर गलतबयानी करते हुए भारत पर कई आरोप मढ़े थे। रोहिंग्या मुसलमानों पर कथित अत्याचार का रोना रोया था।
मोदी मैजिक पर सवार होकर आए पीके को अब तक जो एकमात्र मुश्किल मोर्चा मिला है उस पर वे बुरी तरह नाकाम रहे। सो, यह देखना दिलचस्प होगा कि वे सियासी महत्वाकांक्षाओं को पूरा कर पाएँगे या फिर ब्रांडिंग की दुनिया के रामविलास' बनकर ही रह जाएँगे।
कॉन्ग्रेस नेताओं से भरी संसदीय समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया था कि पाकिस्तान या बांग्लादेश से आने वाले बहुसंख्यकों (अर्थात मुस्लिमों) को नागरिकता नहीं दी जानी चाहिए। समिति में प्रणब मुखर्जी, सिब्बल, मोतीलाल वोरा,अंबिका सोनी जैसे कॉन्ग्रेसी थे। लालू जैसे सहयोगी भी।
उत्तर 24 परगना में हृदयपुर के पास रेलवे ट्रैक से पुलिस ने चार देसी बम बरामद किए। कूच बिहार में प्रदर्शनकारियों ने बस पर पथराव किया। राज्य में सीएए के विरोध के नाम पर भी जमकर हिंसा हुई थी।
कॉन्ग्रेस ने मोदी सरकार की कथित नाकामियों को उजगार करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में आंदोलन की योजना बनाई थी। इसकी समाप्ति रामलीला मैदान की भारत बचाओ रैली से होनी थी।
"प्रत्येक राजनीतिक दल और व्यापारी, शिक्षक, डॉक्टर तथा मजदूर सहित सभी तबकों के लोग, सरकार की नीतियों से नाखुश हैं। इससे मुझे लगता है कि इमरान खान अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएँगे।"