मोदी मैजिक पर सवार होकर आए पीके को अब तक जो एकमात्र मुश्किल मोर्चा मिला है उस पर वे बुरी तरह नाकाम रहे। सो, यह देखना दिलचस्प होगा कि वे सियासी महत्वाकांक्षाओं को पूरा कर पाएँगे या फिर ब्रांडिंग की दुनिया के रामविलास' बनकर ही रह जाएँगे।
कॉन्ग्रेस नेताओं से भरी संसदीय समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया था कि पाकिस्तान या बांग्लादेश से आने वाले बहुसंख्यकों (अर्थात मुस्लिमों) को नागरिकता नहीं दी जानी चाहिए। समिति में प्रणब मुखर्जी, सिब्बल, मोतीलाल वोरा,अंबिका सोनी जैसे कॉन्ग्रेसी थे। लालू जैसे सहयोगी भी।
उत्तर 24 परगना में हृदयपुर के पास रेलवे ट्रैक से पुलिस ने चार देसी बम बरामद किए। कूच बिहार में प्रदर्शनकारियों ने बस पर पथराव किया। राज्य में सीएए के विरोध के नाम पर भी जमकर हिंसा हुई थी।
कॉन्ग्रेस ने मोदी सरकार की कथित नाकामियों को उजगार करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में आंदोलन की योजना बनाई थी। इसकी समाप्ति रामलीला मैदान की भारत बचाओ रैली से होनी थी।
"प्रत्येक राजनीतिक दल और व्यापारी, शिक्षक, डॉक्टर तथा मजदूर सहित सभी तबकों के लोग, सरकार की नीतियों से नाखुश हैं। इससे मुझे लगता है कि इमरान खान अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएँगे।"
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन कार्यकर्ताओं को देखकर लग रहा था जैसे उन्हें शरद यादव को सुनने की कोई जिज्ञासा ही नहीं। इसलिए उन्होंने समय गंवाने से अच्छा सभागार से बाहर निकलना समझा।
यह किसी से छुपा नहीं है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को हटाने के लिए स्वरा भास्कर ने सारी हदें पार कर दी थीं, ट्विटर पर लोगों ने स्वरा को टारगेट करके पनौती तक लिख दिया था।