जब तत्कालीन भाजपा सरकार ने पहलू खान और उनके बेटों पर गो-तस्करी का आरोप लगाया था तो कॉन्ग्रेस ने बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद पर प्रतिबंध लगाने की माँग की थी और आरोप लगाया था कि राज्य में गो-रक्षा के नाम पर सांप्रदायिक तनाव को भड़काने की कोशिश की जा रही है। और अब सत्ता में आते ही राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ने पहलू खान को गो-तस्करी के में मामले में अपराधी बताया है।
एसओजी का दावा है कि दम्पति ने राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और नई दिल्ली के भोले-भाले लोगों को चोटी के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला, बैंक, रेलवे जैसे 'मलाईदार' विभागों में नौकरी जैसे प्रलोभन देकर लगभग ₹2 करोड़ ऐंठे हैं। पुलिस ने यह भी दावा किया कि आरोपित दिल्ली के वरिष्ठ नेताओं और नौकरशाहों के सम्पर्क में भी हैं, और लोगों को ठगने के लिए अपने फर्जी प्रभाव का इस्तेमाल करते हैं।
राजस्थान सरकार ने पहले तो स्कूली पाठ्यक्रम से विनायक दामोदर सावरकर से जुड़े चैप्टर को हटाने का फैसला किया था, लेकिन भाजपा के विरोध के बाद फैसला पलटा गया। अब विनायक दामोदर सावरकर का चैप्टर पाठ्यक्रम में तो है, लेकिन राजस्थान सरकार की नजर में अब वो ‘वीर’ नहीं है।
राजकुमार द्वारा पड़ोस में रहने वाली 5 वर्षीय बालिका को टॉफी देने के बहाने पास के खंडहर नुमा मकान में ले जाकर दुष्कर्म किया गया। दुष्कर्म के बाद भारी पत्थर से बालिका के सिर में मारकर हत्या कर दी गई थी।
गहलोत को अपनी कुर्सी जाने का भय सता रहा है। इसलिए वो पिछले 3 दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और लगातार कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। जबकि पायलट इन दिनों राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में घूम रहे हैं। किसानों के बीच खुले आसमान में खाट पर बैठकर...
पिछले महीने इमरान भाटी ने न केवल ब्रह्मण लड़की से शादी करने के लिए उसके पिता को अपनी गलत पहचान बताई थी बल्कि उनसे काफी दहेज भी लिया था। लड़कीं के पिता ने बताया है कि उन्होंने इमरान को 11 लाख कैश और 5 लाख के जेवर दिए थे।
कभी दिल्ली के राजीव चौक पर हो जाता है, तो कभी राजस्थान के सचिवालय में हो जाता है, कभी-कभी तो संसद में भी चल पड़ा था। लेकिन, इसका मतलब ये नहीं कि एक बार गलती से चला दो और दूसरी बार जाँच करने के लिए। हालाँकि, जो भी हुआ उसमें डिजिटल इंडिया और दैनिक सस्ते इंटरनेट की छाप तो है ही, चाहे गोदी मीडिया कितना भी छुपाने की कोशिश करे।
अशोक गहलोत ने कहा, "यदि जीतने पर श्रेय लेने के लिए सभी लोग आगे आ जाते हैं तो हारने पर भी ज़िम्मेदारी सामूहिक होनी चाहिए। ये चुनाव किसी एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सामूहिक नेतृत्व में संपन्न हुआ है।"
हरीश मीणा का धरना तीन दिन से जारी है। उनकी माँग भजनलाल मीणा नामक ट्रैक्टर-चालक को न्याय दिलाने की है, जिनकी संदेहास्पद स्थितियों में टोंक के लक्ष्मीपुरा गाँव में मौत हो गई थी।
समाज इस भरोसे से अहिंसक होता है कि उसे अन्याय से लड़ने के लिए हथियार उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राजस्थान सरकार अलवर के किसानों को यह भरोसा दे सकती है?