इस गंभीर आरोप को अमेरिकी राष्ट्रपति ने सिरे से खारिज कर दिया और कहा, “मैं अपने जीवन में इस महिला से कभी नहीं मिला।” अपने बयान में ट्रंप ने इस आरोप को फर्जी खबर बताया और सवाल किया कि इस घटना का कोई सबूत या गवाह क्यों नहीं है?
शहर के जाने-माने लिस्बन रेस्ट्रोबार में महिला को अवैध रूप से काम पर रखा गया था। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि जब उसने मदद के लिए पुलिस से गुहार लगाई तो पुलिस ने भी उसे बचाने में आनाकानी की।
नाना पाटेकर के बारे में मुंबई पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उनके ख़िलाफ़ इस मामले में किसी भी प्रकार का सबूत न मिलने के कारण जाँच आगे नहीं बढ़ाई जा सकती और पुलिस इस केस को बंद किया जाता है।
पुलिस अधिकारियों द्वारा बरती गई लापरवाही पर डीजी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस के बयानों को अंतिम सत्य के रूप में नहीं लिया जा सकता है, ख़ासकर तब जब साइंटिफ़िक सबूत कुछ और ही हक़ीकत बयाँ करते हों।
"याद कीजिए जब तीसरे मोर्चे की महामिलावटी सरकार थी, समाजवादी पार्टी मंत्रिमंडल में थी, तब इन्होंने देश का क्या हाल कर दिया था?” उन्होंने कहा कि इन महामिलावटी सरकार ने हमारे पूरे खूफ़िया तंत्र को दीमक लगा दिया था, खोखला कर दिया था, बर्बाद कर दिया था। इसका ख़ामियाज़ा देश को लंबे समय तक भुगतना पड़ा था।"
रॉय पर आरोप हैं कि उन्होंने दक्षिण 24 परगना में एक नाबालिग लड़की का यौन शोषण किया है। इसके मद्देनजर ही राज्य के बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने रॉय के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाई है।
ये मेरा ही तो रूप है जो बसों में उस पर गिर जाता है, जो गर्ल्स हॉस्टल की खिड़कियों की सीध में अपने लिंग पर हाथ फेरता है। वो मैं ही तो होता हूँ जो अपनी किसी जान-पहचान की बच्ची को चॉकलेट देकर कहीं ले जाता हूँ, और उसके साथ हैवानियत दिखाने के बाद उसकी हत्या भी कर देता हूँ।
"पीछे की टायर में हवा कम है, प्लीज आगे की सीट पर आके बैठ जाओ मैडम..." से शुरू हुआ छेड़खानी का खेल। पीड़िता को मदद के नाम पर Uber ने बिना पुलिस को बताए राइड कैंसल करके ड्राइवर इरफान की ही भागने में मदद कर दी। कंंपनी में शिकायत पर उसने जान से मारने की धमकी भी दी।
जेट एयरवेज कंगाली की कगार पर है और इसके संस्थापक नरेश गोयल के दाऊद से संपर्क की बातें होती रही हैं। इसी तरह राफेल मामले में सुनवाई को प्रभावित करने की कोशिश की गई। प्रशांत भूषण ने मीडिया में झूठ क्यों बोला? कौन सा तंत्र काम कर रहा है CJI पर लगे आरोपों के पीछे?
इस पैनल का नेतृत्व जस्टिस एसए बोडबे कर रहे थे। उन्होंने बताया कि पैनल की रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश एवं दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को सबमिट कर दी गई है। चूँकि यह एक अनौपचारिक जाँच थी, इसीलिए इस जाँच की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।