Sunday, November 29, 2020

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शाहीन बाग

‘घर में भी तो हो सकता है Corona, प्रोटेस्ट से कोई लेना-देना नहीं’: शाहीन बाग़ ने बताया कोरोना को CAA विरोध शांत करवाने की...

शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कोरोना वायरस कि अफवाह केवल अमित शाह या केजरीवाल का एक बहाना है, जिससे CAA का विरोध खत्म किया जा सके।

‘सुन लो मोदी, हमारी माँ-बहनों ने टीपू सुल्तान को जन्म दिया है और तुम…’ – शाहीन बाग़ से हिंसा की अपील

"सुन लो मोदी, हमारी माँ-बहनों ने टीपू सुल्तान को जन्म दिया है और तुम हमसे नागरिकता का सबूत माँगते हो! लालकिला जहाँ से झंडा फहराते हो, ये क्या तुम्हारे पूर्वजों ने बनवाया? ताजमहल जहाँ ट्रम्प को लेकर गए थे, क्या तुम्हारे पूर्वजों ने बनवाया था? तुमने शौचालय बनवाए हैं, जाओ और वहाँ से झंडा फहराओ।"

मोदी हमसे डरते हैं, हम कोरोना से नहीं डरते, ये अल्लाह का अज़ाब है, कुरान हमारी रक्षा करेगा: शाहीन बाग की बुर्कानशीं महिलाएँ

केजरीवाल सरकार की अपील के बाद भी शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों का सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। इक तरफ चीन के बुहान शहर से तेजी से फैली महामारी ने दुनियाँ को बंद कर दिया है। तो वहीं दूसरी ओर शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी धरना स्थल पर कुरान पढ़ रहे हैं। यह मानते हुए कि अल्लाह उन्हें कोरोना के संकट से बचाएगा।

सरकार से मास्क और सेनिटायजर माँगने वाले शाहीन बाग में चौकी तो है, लोग नहीं

तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि धरना स्थल पर कुछ मीटरों की दूरी पर जगह-जगह रहे तख्त पर इक्का-दुक्का महिलाएँ बैठी हुई दिखाई दे रही हैं। वहीं कुछ प्रदर्शनकारी मुँह पर मास्क पहने दिखाई दिए, लेकिन दिल्ली सरकार द्वारा कोरोना के खतरे को देखते हुए 50 से अधिक लोगों के एक स्थान पर एकत्र न होने की चेतावनी शाहीन बाग के काम नहीं आई।

हम यहाँ से नहीं हटेंगे: शाहीन बाग़ की महिलाओं ने पुलिस के अनुरोध को नकारा, कोरोना वायरस फैलने का ख़तरा

अभी तक भारत में कोरोना वायरस के चलते तीन मौत हो चुकी हैं, इनमें पहली कर्नाटक, दूसरी दिल्ली और तीसरी मौत महाराष्ट्र में हुई है। वहीं देश में कोरोना वायरस के अब तक 126 मामले सामने आ चुके हैं।

दिल्ली दंगों में जिन मुस्लिमों को गिरफ्तार किया, उन्हें रिहा करो: कानूनी प्रक्रिया में शाहीन बाग की भीड़ का दबाव

शाहीन बाग से प्रदर्शनकारियों द्वारा गिरफ्तार आरोपित मुस्लिमों की रिहाई की माँग करना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। आरोपित की रिहाई कानूनी प्रक्रिया के तहत होती है, भीड़ की माँग पर नहीं। फिर आखिर क्या वजह है कि शाहीन बाग में धरने पर बैठी भीड़ आरोपितों को छोड़ने के लिए दबाव बना रही है?

दंगों की फंडिंग और प्लानिंग पर कसा शिकंजा, मंदर-नक़वी गिरोह ने शाहीन बाग प्रदर्शन खत्म करने को कहा

हर्ष मंदर ने कहा कि शाहीन बाग में पिछले कुछ महीनों से हो रहे विरोध प्रदर्शन को अब वापस ले लेना चाहिए, क्योंकि इसका इस्तेमाल आरएसएस और उसके सहयोगियों द्वारा मुस्लिमों के खिलाफ हेट कैंपेन को बढ़ावा देने के लिए ट्रिगर के रूप में किया गया।

शाहीन बाग़ इलाके से मिला 3 शव, सिर्फ एक की ही हो सकी है अभी तक पहचान: पुलिस की जाँच जारी

दिल्ली के शाहीन बाग़ इलाके से 3 शवों के मिलने की खबर से हड़कंप मच गया है। ये तीनों शव शाहीन बाग़ क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों से मिले हैं, जिनमें से 1 की पहचान हो चुकी है।

शाहीन बाग में सिर्फ 19 महिला प्रदर्शनकारी: हकीकत सामने आई तो महिला पत्रकारों से बदसलूकी, सब कुछ कैमरे में कैद

लाइव कैमरे पर शाहीन बाग के प्रदर्शकारियों की गिनती की गई। निकली मात्र 19! इस गिनती को सुन धरने पर मौजूद महिलाएँ भड़क उठीं, उन्होंने इमरजेंसी सायरन बजा दिया। इसके बाद वहाँ सैकड़ों लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। महिला पत्रकारों के साथ बदसलूकी के बाद कैमरे को तोड़ने की कोशिश की गई।

दम तोड़ रहा है शाहीन बाग: खाली पंडाल में कैमरा देख औरतों ने बजाया हूटर, दौड़ते आए मर्द

एक चैनल की टीम आज प्रदर्शन को कवर करने पहुॅंची। वहॉं करीब 19 औरतें ही थीं। कमजोर होते प्रदर्शन की सच्चाई छिपाने के लिए औरतों ने हूटर बजाया तो कुछ मर्द वहॉं पहुॅंचे। उन्होंने डराने के लिए महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी भी की।

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“मैं प्रदर्शनकारी किसानों से अपील करता हूँ कि भारत सरकार बातचीत करने के लिए तैयार है। कृषि मंत्री ने उन्हें 3 दिसंबर को चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। सरकार किसानों की हर समस्या और माँग पर विचार करने के लिए तैयार है।”

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पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ओएमए सलाम ने भी घोषणा किया कि उनका इस्लामी संगठन ‘दिल्ली चलो’ मार्च का समर्थन करेगा। वह किसानों की माँगों के साथ खड़े हैं।

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सीएम योगी के रोड शो के में- ‘आया आया शेर आया.... राम लक्ष्मण जानकी, जय बोलो हनुमान की’, योगी-योगी, जय श्री राम, भारत माता की जय और वंदे मातरम के भी गगनभेदी नारे लगाए गए।

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मीटिंग 3 दिसंबर को तय की गई है और हम तब तक यहीं पर रहने वाले हैं। अगर उस मीटिंग में कुछ हल नहीं निकला तो बैरिकेड तो क्या हम तो इनको (शासन प्रशासन) ऐसे ही मिटा देंगे।

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