क्या नकाबपोश गुंडी और शाम्भवी, दोनों एक ही हैं? सच जानने के लिए हमें दोनों तस्वीरों को बारीकी से देखना चाहिए। दोनों की शारीरिक बनावट एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है। शर्ट का चेक पैटर्न भी अलग। जूते से लेकर कलावा तक में अंतर - लेकिन प्रोपेगेंडा फैलाना ही एकमात्र काम हो तो कोई क्या करे!
शेहला रशीद ने ट्विटर पर लिखा- "अल्लाह का शुक्र है कि नरेंद्र मोदी की कोई औलाद नहीं है। अगर उनके बच्चे होते तो उन्हें स्कूल में काफ़ी शर्मिंदा होना पड़ता।" ये पहली बार नहीं है जब शेहला रशीद ने पीएम मोदी को लेकर ऐसी टिप्पणी की हो।
अपने अकाउंट से सोशल मीडिया पर इस तरह के नफरत फैलाने वाले पोल चलाने के बाद ट्विटर ने रोहित चोपड़ा के ट्विटर अकाउंट ‘@IndiaExplained’ को निलंबित कर दिया। इसके बाद भी अपने पर्सनल अकाउंट से रोहित का जहर फैलाना जारी रहा।
पाकिस्तानी एजेंडे के तहत भारत के खिलाफ प्रोपगेंडे को हर रोज भारी तादाद में सोशल मीडिया पर फैलाने के लिए यूथ मशीनरी को पाक ISPR में भर्ती कर रहा हैं। झूठ फ़ैलाने के लिए युवाओं को बाकायदा ट्रेनिंग का भी प्रावधान किया गया है।
राहुल गाँधी का प्रशंसा पत्र केरल के सीएम के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सार्वजनिक किया गया। इसके बाद UDF को बेहद शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। यूडीएफ केरल का विपक्षी गठबंधन है जिसकी अगुवाई कॉन्ग्रेस करती है।
अपने मुल्क पाकिस्तान में हिंदुओं को प्रताड़ित कर देश छोड़ने पर मजबूर करने वाले पाकिस्तानी CAA विरोध की तस्वीरों को शेयर करके मानवाधिकारों की भी दुहाई दे रहे हैं और चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र इस पर संज्ञान ले.....
फेसबुक पर मुस्लिम स्टूडेंट ऑफ जेएनयू द्वारा अपलोड की गई 14 दिसंबर 2019 की वीडियो है। जिसमें शर्जील सीएए के ख़िलाफ़ लोगों को कहता नजर आ रहा है कि उनकी संपत्तियाँ जब्त कर ली जाएँगी और उन्हें पाकिस्तान भेज दिया जाएगा। इसके अलावा 40 सेकेंड की वीडियो में वो कुरान का हवाला दे देकर बताने की कोशिश कर रहा है कि आखिर किस तरह कुरान, संविधान से ऊपर हैं।
Reddit यूजर का दावा है कि सरकार के खिलाफ अभियान चलाने के लिए अमेज़ॅन वेब सेवाओं पर 40 से अधिक सर्वर चलाकर, वह लगातार 'आईटी सेल के ट्विटर पोल" को हराने में सक्षम है।
सोशल मीडिया में एक तस्वीर बड़ी तेज़ी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में 72 वर्षीय शिया मौलवी असद रज़ा हुसैनी के एक हाथ पर प्लास्टर चढ़ा हुआ है और शरीर पर घाव के निशान हैं। सहानुभूति बटोरती इस तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है, जो दंगाइयों, मीडिया-सोशल मीडिया गिरोह के प्रोपेगेंडा को उजागर करती है।
"हिंसा किसने शुरू की, इसकी जाँच होनी चाहिए, क्योंकि कौन जानता है कि आगजनी किसने शुरू की। आप बिना जाँच के कैसे कार्रवाई कर सकते हैं? पहले यह पता करें कि हिंसा किसने शुरू की?"