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CAA का समर्थन करने पर जिहादी बना रहे निशाना: केरल के एक डॉक्टर ने बयाँ किया दर्द

केरल की वामपंथी सरकार भी इस कानून का विरोध कर रही है। इस संबंध में विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पास किया गया था। हालॉंकि राज्यपाल ने नागरिकता को केंद्र का विषय बताते हुए इस महत्वहीन बताया था।

केरल के तिरुवनंतपुरम के डॉक्टर रंजीत विजयाहरि ने दावा किया है कि नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) का समर्थन करने के कारण उन्हें इस्लामी कट्टरपंथी निशाना बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर बुधवार (15 जनवरी) को इस संबंध में उन्होंने कई ट्वीट्स किए। इनमें उन्होंने बताया है कि वे गैस्ट्रो सर्जन हैं और अपनी पत्नी के साथ हॉस्पिटल चलाते हैं। उन्होंने बताया है कि CAA का समर्थन करने के लिए ‘जिहादी तत्व’ उन्हें परेशान कर रहे हैं।

डॉ. विजयाहरि सेवा भारती के कार्यकर्ता रहे हैं और RSS से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कट्टरपंथियों का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया है। इसमें उनके और उनकी प्रैक्टिस को बदनाम करते हुए दावा किया गया कि “साम्प्रदायिक” होने के कारण वे सहानुभूति की उम्मीद नहीं रख सकते।

एक अन्य व्यक्ति को रोगियों को अवांछित सलाह देते हुए देखा जा सकता है कि जब वे डॉक्टर के दवाखाने जाएँ तो सावधान रहें। उन्होंने कुछ अन्य स्क्रीनशॉट भी शेयर किए, इनमें उन्होंने दावा किया कि चिकित्सा के पेशे से जुड़े उनके दोस्तों को भी ‘प्रतिकूल राजनीतिक विचारों’ के लिए अनैतिक प्रथाओं और ‘क्रूर उपचार’ के आरोपों के साथ निशाना बनाया गया है।

दरअसल, राज्य की वामपंथी सरकार नागरिकता संशोधन क़ानून के पारित होने बाद से ही इसके विरोध में खड़ी हुई है। यहाँ तक ​​कि इस क़ानून को रद्द करने की माँग करते हुए केरल विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पारित किया था, जिसे कॉन्ग्रेस ने भी समर्थन दिया था। केरल सरकार ने अब सर्वोच्च न्यायालय में CAA के ख़िलाफ़ मुकदमा भी दायर किया है।

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने इस प्रस्ताव को ग़ैर-कानूनी और असंवैधानिक करार दिया था। उनका कहना था कि नागरिकता विशेष रूप से केंद्र का विषय है, इसलिए इस प्रस्ताव का वास्तव में कोई महत्व नहीं है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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